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Showing posts from September, 2022

सुबाभूल कुकुरमुण्डा गुजरात में नया इतिहास लिखा जा रहा है | इतिहास के रचियता है, मल्टीप्लायर तथा पुरषोत्तम भाई |

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  सुबाभूल कुकुरमुण्डा गुजरात में नया इतिहास लिखा जा रहा है | इतिहास के रचियता है, मल्टीप्लायर तथा पुरषोत्तम भाई | १) ऐतिहासिक कार्यों को ही इतिहास में जगह मिलती है, दोस्तों जहाँ मल्टीप्लायर का इस्तेमाल नहीं हुआ है, वहां सुबाभुल की ऊंचाई है ३ से ५ फुट, और स्टंप की जाड़ी है उंगली की जाड़ी के बराबर, और जिस खेत में मल्टीप्लायर दिया है, वहां पेड़ की ऊंचाई है ९ से १२ फुट और स्टंप की जाड़ी, में नहीं बताऊंगा, क्योंकि अगर में बताऊंगा तो आप विश्वास नहीं कर पाओगे, इसलिए आप स्वयं फोटो में देख लो | २) दोस्तों जहाँ इतिहास लिखा जा रहा है उस गांव का नाम है, कुकुरमुण्डा जिला बरोडा गुजरात, और किसान भाई का नाम है, पुरषोत्तम भाई इनका मोबाइल नंबर भी जान लीजिए, 93286 54125 आप सभी जानते है की कंपनी कभी भी किसान भाई का मोबाईल नंबर नहीं देती, क्योंकि जानकारी लाखों लोगों तक जाती है, फोन सुनते-सुनते किसान भाई परेशान हो जाएगा, परन्तु यहाँ के रिझल्ट अविश्वसनीय होने के कारण कंपनी ने किसान भाई से निवेदन किया की आपका नंबर पब्लिश करना पड़ेगा, और किसान भाई ने सहमति दी है | ३) कुकुरमुण्डा गांव के बहोत सारे किसान भाई स...

सोयाबीन की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से सभी अतिरिक्त खर्चों की बचत हो गई!

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सोयाबीन की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से सभी अतिरिक्त खर्चों की बचत हो गई! १) किसान भाई का नाम अजीतसिंग मोहिते ग्राम येलगूड तहसील हातकणंगले जिला कोल्हापुर, इन्होने ९.५ एकड़ क्षेत्र पर सोयाबीन तथा उड़द की फसल लगाईं थी. २) आपकी फसल में उसे उत्पादनक्षम बनाने के लिए अनेक प्रकार के अलग-अलग उत्पादन पर काफी खर्च करते हैं, उसके बावजूद आपका उत्पादन नियमित से अधिक नहीं मिलता, आप दूसरे सभी खर्चों को ना करते हुए सिर्फ मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करिये, आपके खर्चों में बचत के साथ उत्पादन बढ़कर मिलेगा. ३) किसान भाई ने १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर प्रति एकड़ १० पंप छिड़काव किये, उसके बाद १५ लीटर पानी में ४० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर पौधों के रूट झोन में प्रति एकड़ १० पंप ड्रेंचिंग किये. ४) किसान भाई ने ९.५ एकड़ में कुल ७ किलो मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, फसल लगातार गहरे हरे रंग की बनी रही, गहरे हरे रंग के पत्तों पर सूर्यप्रकाश की मदत से लगातार अधिक भोजन बनता रहा, फसल स्ट्रांग बन गई, अधिक भोजन की उपलब्धता के कारण ग्रोथ तेजी से हुई, किड तथा रोग की समस्या साधारण रही, महँगी दवाओं की आवश्यकता नहीं प...

मल्टीप्लायर तकनीक ने मरनेवाली उडिद डाल की फसल को जिन्दा किया..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक ने मरनेवाली उडिद डाल की फसल को जिन्दा किया..!! १) किसान भाई का नाम है अनिल ग्राम लसूड़ी आंत्री तहसील मनासा जिला नीमच मध्यप्रदेश, किसान भाई ने उड़द की फसल लगाईं थी, काफी प्रयत्नों के बावजूद फसल पीली पड़ती जा रही थी, किसान भाई ने कहा समस्या कोई भी हो मल्टीप्लायर समस्या को ढूंढकर उसका इलाज करने में सक्षम है. २) किसान भाई ने मल्टीप्लायर के विषय में सुन रखा था, तुरंत मल्टीप्लायर खरेदी किया, २०० लीटर पानी में २०० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया, कुछ ही दिनों में फसल के पत्ते हरे-हरे होने लगे, किसान भाई ने खुश होकर एक बार फिर से मल्टीप्लायर का छिड़काव किया. ३) आप फोटो में देख सकते हैं पूरी की पूरी फसल गहरे हरे रंग की बन गई है, तेजी से फूल आना प्रारम्भ हो गया है.

रेशम के पत्ते, शहतूत. ग्रोथ देखकर सभी चकित रह गए!

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  रेशम के पत्ते, शहतूत. ग्रोथ देखकर सभी चकित रह गए! १) किसान भाई का नाम गंगाधर कोरी बेलगांव, इनकी रेशम के पत्तों की खेती पीली पड़ गई थी, अनेक उपायों के बावजूद फसल हरी नहीं हो रही थी, पीली पड़ जाने के कारण ग्रोथ पूरी तरह से रुक गई थी. २) किसान भाई ने कंपनी के प्रतिनिधि सतीश माली सर को अपनी समस्या से अवगत कराया, माली सर ने बताया, फसल ग्रोथ ना करने के अनेकों कारण होते हैं, प्रत्येक कारण का उपचार करने की आवश्यकता नहीं है, आप मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करो, मल्टीप्लायर कारण को ढूंढकर उसका उपचार करने में सक्षम है, ८ दिन में फसल हरी हो जाएगी. ३) किसान भाई ने १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + १ मिली स्प्रे प्लस मिलाकर १० दिन के अंतर से २ बार छिड़काव किया. ४) पहला छिड़काव होते ही फसल हरी होने लगी, दूसरा छिड़काव होते ही तेजी से बढ़ने लगी, किसान भाई के साथ-साथ वो सभी किसान भाई जो इस फसल की समस्या से परिचित थे, इस चमत्कार नमस्कार कहते हुए मल्टीप्लायर के ग्राहक बन गए.

मल्टीप्लायर का कमाल चन्दन के बीज अंकुरित हो गए!

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  मल्टीप्लायर का कमाल चन्दन के बीज अंकुरित हो गए! 1) जिन्होंने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया है, उनका कहना है की, मल्टीप्लायर कुछ भी कर सकता है. 2) इसमें अतिशयोक्ती कुछ भी नहीं है. 3) नागपुर के दिनेश ठाकरे सर ने अशक्य को शक्य करने की ठानकर चन्दन के बीजों को १६ घंटे पानी में भिगाकर रखा, फिर मल्टीप्लायर ट्रीटमेंट करके अंकुरित होने के लिए, नर्सरी के बेड में लगा दिया. 4) अनेक लोगों ने चर्चा में बताया की, आज तक चन्दन के बीजों को कोई भी अंकुरित नहीं कर सका, अगर ये सच है, तब दिनेश ठाकरे सर ने कमाल कर दिया. 5) अभी तक चन्दन के टिश्यू कल्चर पौधे लगाए जाते थे, जो महंगे होते हैं, दूर से आते हैं, अब आप कम कीमत में चन्दन की खेती कर सकेंगे.

मोसम्बी यमराज से भी लड़ने की ताकत रखता है मल्टीप्लायर तकनीक ने, मर चुके पेड़ जिन्दा हो गए..!!

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  मोसम्बी यमराज से भी लड़ने की ताकत रखता है मल्टीप्लायर तकनीक ने, मर चुके पेड़ जिन्दा हो गए..!! १) किसान भाई का नाम सुनील इंगले चांदुर बाजार अमरावती, किसान भाई के पास मोसम्बी की बाग़ है,उसमें कुछ पौधे मर गए थे, उनमें एक भी पट्टी नहीं बची थी. २) किसान भाई की मुलाक़ात कंपनी के डीलर प्रवीण सर से हुई, सर ने बताया की, में कोई ग्यारंटी नही दूंगा, परन्तु मोसम्बी के मरे पेड़ जिन्दा हो सकते हैं. ३) किसान भाई ने प्रयोग करने का निश्चय किया, २५० ग्राम मल्टीप्लायर २०० लीटर पानी में डालकर मर चुके पौधों को २ बार आठ-आठ दिन के अंतर से दिया. ४) १५ दिन के बाद पौधों में नई पत्तियां आने लगी, आप फोटो में देख सकते हैं.

मल्टीप्लायर तकनीक से बरबटी (लोबिया) की आर्गनिक खेती..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से बरबटी (लोबिया) की आर्गनिक खेती..!! १) किसान भाई का नाम श्री आज़ाद कुमार ग्राम काकोरी सैदपुर जिला लखनऊ उत्तरप्रदेश. २) बरबटी की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ३) कंपनी बताती है, धीरे-धीरे रासायनिक कम-कम करते हुए आर्गनिक की तरफ बढ़ना है, परन्तु कुछ किसान भाई रिस्क लेकर पहले दिन से आर्गनिक खेती करते हैं. ४) इन्होने रासायनिक खाद का एक दाना भी नहीं डाला, फसल की जोरदार निरोगी ग्रोथ के लिए मल्टीप्लायर, फफूंद रोग (फंगस) समस्या के लिए कृष्णा ऑल क्लियर, किड समस्या के लिए कृष्णा नारायणअस्त्र तथा छिड़काव को कार्यक्षम बनाने के लिए कृष्णा स्प्रे प्लस का इस्तेमाल किया. ५) सम्पूर्ण मल्टीप्लायर तकनीक के इस्तेमाल के कारण दूसरे किसी भी उत्पाद की आवश्यकता नहीं पड़ी, खर्च में बचत के साथ उत्पादन बढ़कर मिल रहा है.

मल्टीप्लायर तकनीक से सिर्फ १० दिन में बरबटी बिन्स का आकार २ फुट लंबा बन गया..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से  सिर्फ १० दिन में बरबटी बिन्स का आकार २ फुट लंबा बन गया..!! १) किसी भी फसल को ९६.२ प्रतिसत भोजन सूर्यप्रकाश हवा तथा पानी से मिलता है, आज किसान भाई की समस्या यह है की, प्रकृति द्वारा दिया जानेवाला फ्री भोजन मिलने में समस्या आ रही है, इसलिए किसान भाई स्वयम फसलों को भोजन देने के प्रयत्न में कंगाल बनता जा रहा है. २) मल्टीप्लायर आपकी मिटटी की तथा फसलों की समस्याओं को तुरंत प्रभाव से दूर करके प्रकृति और आपकी फसलों के बीच बन चुकी दुरी को समाप्त करने का काम करता है, इसलिए मल्टीप्लायर मिलते ही, फसलों को प्रकृति द्वारा मिलनेवाले भोजन को मिलने में आ रही अड़चने दूर हो जाती हैं. ३) ऐसा ही कुछ हुआ प्रदीप साहू साहब ग्राम तोरा जिला रायगढ़ के खेत में बरबटी की फसल में फसल को आवश्यकता के अनुरूप भोजन ना मिलने के कारण बरबटी की ग्रोथ नहीं हो रही थी, संख्या भी कम थी. ४) विष्णु प्रसाद जी जो जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़ में कृषि अधिकारी हैं, इनके पास एक्सटेंशन का काम है, हर दिन किसान भाइयों से मुलाकात होती रहती है, उनकी समस्याओं का समाधान ढूँढना विष्णु प्रसाद जी का काम है. ५) कंपनी के बिजनेस...

तिल की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से पत्तों का ऐसा आकार कभी देखा नहीं..!!

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तिल की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से पत्तों का ऐसा आकार कभी देखा नहीं..!! १) अर्जुन प्रधान ग्राम रानीडीह पोस्ट लुकापुरा तहसील सरिया जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़, किसान भाई ने मल्टीप्लायर की मदत से ऐसी तिल की फसल उगाई है, जिसकी चर्चा पुरे गाव में हो रही है. २) किसान भाई ने आधा एकड़ क्षेत्र पर लगाईं जानेवाले तिल के बीजों को, २० ग्राम मल्टीप्लायर के घोल में १ घंटे भिगाकर रखा, उसके बाद ३ घंटे सुखाया, फिर जमीन में बुवाई की. ३) जमीन तैयार करते समय ५० किलो DAP में १ किलो मल्टीप्लायर मिलाकर दिया, फसल १५ दिन की होने के बाद मल्टीप्लायर का छिड़काव किया. ४) पहला छिड़काव होने के बाद ८ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर लगातार छिड़काव किया जा रहा है. ५) फसल ताकतवर बन गई है, उसका स्टंप जाड़ा बन गया है, पत्तों का आकार अविश्वसनीय है, तिल की फसल में इतने बड़े पत्ते देखने को नहीं मिलते और सबसे बड़ी बात यह की पहले ही दिन से फसल का कलर डार्क ग्रीन बना हुआ है.

तीळ, तील उत्पादन कम से कम 50 प्रतिसत तक बढ़कर मिलेगा!

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  तील उत्पादन कम से कम 50 प्रतिसत तक बढ़कर मिलेगा! 1) किसान भाई का नाम अमरु भाई खसिया ग्राम वागेन्द्रा तहसील खाम्बा जिला अमरेली गुजरात, किसान भाई स्वयं कंपनी के प्रतिनिधि हैं तथा कृषि केंद्र के संचालक हैं. 2) अमरु भाई ने 2 एकड़ क्षेत्र में तिल्ली की फसल लगाईं थी. 3) उन्होंने प्रति एकड़ २ किलो मल्टीप्लायर DAP खाद में मिलाकर दिया. 4) फसल तेजी से बढ़ने लगी, प्रत्येक पत्ते के पास तिल की फली लग रही है, अभी फसल ग्रोथ में है, परन्तु जितना उत्पादन दिख रहा है, उसे देखकर अमरु भाई का कहना है की, उत्पादन कम से कम 50 प्रतिसत तक बढ़कर मिलेगा.

टिंडे ढेमसे की खेती में प्रत्येक 4 दिन के अंतर से 400 किलो उत्पादन मिल रहा है!

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  टिंडे ढेमसे की खेती में प्रत्येक 4 दिन के अंतर से 400 किलो उत्पादन मिल रहा है! 1) किसान भाई का नाम भाईदास रामदास पाटील ग्राम एकलहरे तहसील अमलनेर जिला जळगाव, इनको कंपनी के प्रतिनिधि प्रभुसिंग परदेशी सर ने मल्टीप्लायर तकनीक से आसान और बढे हुए उत्पादन की खेती करने की तकनीक बताई. 2) किसान भाई ने एक एकड़ क्षेत्र में टिंडे की फसल लगाईं है, इस फसल को रासायनिक खाद के साथ प्रत्येक 10 दिन में 250 ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से दिया है. 3) प्रत्येक 10 दिन के अंतर से 15 लीटर पानी में 10 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया है. 4) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई, प्रत्येक 4 दिन के अंतर से 400 किलो उत्पादन मिल रहा है.

केशर फसल को देखकर किसान भाई बहोत खुश है!

  केशर फसल  १) किसान भाई का नाम अशोक कुमार ग्राम नांगल जिला महेंद्रगढ़ हरयाणा, अशोककुमार सर स्वयं कंपनी के प्रतिनिधि हैं. २) इन्होने आधा एकड़ क्षेत्र पर केशर लगाईं ५०० ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ दिया. ३) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर ३ बार फसल पर छिड़काव किया. ४) मल्टीप्लायर के कारण फसल को प्राकृतिक भोजन बिनामूल्य मिलने लगा, इसलिए फसल का तेजी से सर्वांगीण विकास तथा ग्रोथ हुई. ५) किसान भाई फसल को देखकर बहोत खुश है.

मूली,मुळा इस फसल पर रासायनिक दवाओं का एक भी छिड़काव नहीं करना पड़ा!

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  मूली,मुळा इस फसल पर रासायनिक दवाओं का एक भी छिड़काव नहीं करना पड़ा! १) किसान भाई का नाम चंद्रशेखर वाघ सटाना जिला नाशिक, इनको कंपनी के प्रतिनिधि सुनील शिरोडे सर ने मल्टीप्लायर की मदत से कम खर्च में ज्यादा उत्पादन लेने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने १० आर क्षेत्र में मूली की फसल लगाईं थी. ३) २५० ग्राम मल्टीप्लायर पानी खेत में भरते समय पानी के साथ २ बार दिया. ४) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर २ बार फसल पर छिड़काव किया. ५) मूली की फसल में रस चूसनेवाले किटक ज्यादा आते हैं, इस फसल पर रासायनिक दवाओं का एक भी छिड़काव नहीं करना पड़ा. ६) उत्पादन क्वालिटी बेहतर होने के कारण बाजार में भाव ज्यादा मिला

लगातार बिगड़ते हवामान का फसल पर कोई विपरीत असर नहीं दिखा!

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  लगातार बिगड़ते हवामान का फसल पर कोई विपरीत असर नहीं दिखा! १) किसान भाई का नाम श्री श्यामसुंदर मनोहर जाधव ग्राम तहाराबाद तहसील सटाना जिला नाशिक महाराष्ट्र. २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता -विक्रमवीर पुरस्कार विजेते श्री हिमांशु मिश्रा सर. ३) किसान भाई ने गोबी की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ४) पत्तों का कलर हरा है, सभी पौधों की ग्रोथ एक जैसी हुई है, पत्तों के आकार से पता चलता है की, उत्पादन ज्यादा वजन का मिलेगा, लगातार बिगड़ते हवामान का फसल पर कोई विपरीत असर नहीं दिखा, छिड़काव में कंपनी का आर्गनिक किडनाशक नारायणअस्त्र का इस्तेमाल किया गया है.

पत्ता गोबी की खेती मेंउत्पादन बढ़कर मिला है।

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पत्ता गोबी की खेती मेंउत्पादन बढ़कर मिला है।   १) किसान भाई का नाम- श्री यशवंत कृष्णा चव्हाण ग्राम लखमापुर तहसील दिंडोरी नाशिक महाराष्ट्र। २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता- श्री श्रीमती अनीता गोविन्द सोनवणे मेडम। ३) गोबी की खेती में "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल किया। ४) इस साल ख़राब वातावरण के कारण गोबी की खेती में बहोत नुकसान हुआ है, परन्तु जिस खेत में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल हुआ, उनका उत्पादन बढ़कर मिला है। ५) फोटो दूर से लिया है, इसलिए झूम करके देखें।

पत्ता गोबी का आकार हमेशा के मुकाबले बड़ा मिला है।

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  गोबी का आकार हमेशा के मुकाबले बड़ा मिला है। १) किसान भाई का नाम- श्री दीपक तिदमे ग्राम पिंपळगाव गरुडेश्वर तहसील जिला नाशिक महाराष्ट्र। २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता- श्री दीपक तिदमे सर स्वयं कंपनी प्रतिनिधि हैं। ३) गोबी की खेती में "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल किया। ४) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई, गोबी का आकार हमेशा के मुकाबले बड़ा मिला है। ५) किड रोग समस्या कंट्रोल में रही।

लहसुन,लस्सन, लसुन हाइब्रीड को मात देनेवाला आर्गनिक देशी लसुन!

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  हाइब्रीड को मात देनेवाला आर्गनिक देशी लसुन! १) महेंद्र जयवंत शेंडे सर कंपनी के डीलर हैं, इनकी खेती ग्राम वरकुटे तहसील इंदापुर जिला पुणे में है, सर ने एक दाना भी रासायनिक खाद का नहीं डाला, गोबर का खाद और मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया है. २) देशी लसुन के गड्ढे का आकार छोटा होने के कारण उत्पादन कम आता है, इसलिए अधिक फायदा कमाने के लिए हाइब्रीड जाती लगाईं जाती हैं. ३) महेंद्र सर की लसुन की खेती में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम कार्यरत है, इसलिए उन्होंने ३ बार २५० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप ( टपक पद्धत ) से दिया है. ४) लसुन की फसल पर २ बार १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया है. ५) कीटक नाशक का छिड़काव सिर्फ एक बार किया है, अच्छे परिणाम के लिए उसमें आल क्लियर मिलाकर छिड़काव किया है. ६) आप फोटो में लसुन की फसल झूम करके देखिये और आप लसुन का गद्दा भी देख सकते हैं, अभी उत्पादन निकलने में १५ दिन से ज्यादा का समय बाकी है, उत्पादन निकलने तक गड्ढे का आकार और बड़ा हो जायेगा.

लसुन की आर्गनिक खेती, फिर भी उत्पादन रासायनिक से ज्यादा.

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लसुन की आर्गनिक खेती, फिर भी उत्पादन रासायनिक से ज्यादा .   १) आज तक आर्गनिक खेती की जितनी भी तकनीक खोजी गई हैं, उसमें आर्गनिक खेती का उत्पादन कम आता है. इसलिए किसान भाई आर्गनिक खेती की तरफ जाने को तैयार नहीं हैं. २) मल्टीप्लायर की मदत से की जानेवाली आर्गनिक खेती प्रणाली में उत्पादन पहले दिन से रासायनिक से ज्यादा मिलता है, किड रोग कम हो जाते हैं, और खर्च भी रासायनिक खेती के मुकाबले कम है. परंतु जिस खेत की मिट्टी बहोत ज्यादा ख़राब हो गई है, वहां रासायनिक खाद धीरे-धीरे कम करना पड़ेगा. ३) लोकेश पटेल देवास जिले में सभी के परिचित तथा प्रगतिशील किसान हैं, इनकी खेती, ग्राम लोहारी जिला देवास मध्यप्रदेश में है, इन्होंने इसके पहले भी मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया था, इसलिए लसुन की खेती १०० प्रतिसत आर्गनिक करने का निर्णय लिया. ४) लसुन की बुवाई करने के बाद १ बीघा क्षेत्र में १ किलो जमीन से दिया, और प्रत्येक १० से १५ दिन के अंतर से मल्टीप्लायर का छिड़काव किया, फसल पहले ही दिन से रासायनिक से आगे थी, गाव में सबसे अच्छी फसल लोकेश सर की है, ऐसा कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. ५) आप फोटो झूम करके ...

फसल के पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बना हुआ है.

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 फसल के पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बना हुआ है. १) किसान भाई का नाम गोविन्दभाई चव्हाण ग्राम वनसोल जिला खेड़ा, इनको कंपनी के प्रतिनिधि निरवकुमार चव्हाण सर ने मल्टीप्लायर की ताकत तथा उपयोगिता जानने के लिए फार्मर च्वाइस का पैकेट १ एकड़ क्षेत्र में इस्तेमाल करने की सलाह दी. २) किसान भाई ने ५०० ग्राम मल्टीप्लायर खेत में पानी भरते समय पानी के साथ दिया. ३) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर २ बार फसल पर छिड़काव किया. ४) फसल की ग्रोथ तेज है, किड और रोग की समस्या नहीं है, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बना हुआ है. ५) निरवकुमार सर का कहना है की, फार्मर च्वाइस पैकेट का इस्तेमाल करने से दूसरे सभी खर्चों की बचत हुई, जहरीली दवाओं के खर्च में भी बचत हुई.

मल्टीप्लायर तकनीक से लेमन व्हाइट शेवंती की फसल में फूलों की संख्या भी ज्यादा..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से लेमन व्हाइट शेवंती की फसल में फूलों की संख्या भी ज्यादा..!! १) किसान भाई का नाम श्री नैनेश शेठ ताजणे ग्राम निरगुडे तहसील जुन्नर जिला पुणे महाराष्ट्र. २) किसान भाई ने लेमन व्हाइट शेवंती की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ३) शेवंती के पौधों की ग्रोथ अच्छी हुई, फूलों की संख्या भी ज्यादा है.

शेवंती फूलों की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक से बाजार भाव भी ज्यादा मिला..!!

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शेवंती फूल की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक से बाजार भाव भी ज्यादा मिला..!! १) किसान भाई का नाम श्री सुहेल खान कायमखानी भीलवाड़ा राजस्थान. २) गुलदाउदी फूलों की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ३) रासायनिक खाद से की जानेवाली खेती में फूलों की संख्या कम तथा फूल छोटे-छोटे आते थे. ४) मल्टीप्लायर तकनीक के इस्तेमाल के कारण पौधों की ग्रोथ, शाखाओं की ग्रोथ अच्छी हुई, फूल बड़े आकार के मिल रहे हैं, इसलिए बाजार भाव भी ज्यादा मिल रहा है.

मल्टीप्लायर तकनीक से शेवंती और डेजी के फूलों की खेती में पौधे तेजी से बढे, फूलों की संख्या ज्यादा मिली..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से शेवंती और डेजी के फूलों की खेती में पौधे तेजी से बढे, फूलों की संख्या ज्यादा मिली..!! १) किसान भाई का नाम श्री गजु भेड़े मेंढा जिला भंडारा महाराष्ट्र. २) किसान भाई ने फूलों की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ३) पौधे तेजी से बढे, फूलों की संख्या ज्यादा मिल रही है. ४) किड रोग की समस्या के लिए कृष्णा नारायणअस्त्र तथा कृष्णा ऑल क्लियर का इस्तेमाल किया. ५) खर्च रासायनिक खेती के मुकाबले आधा आया फिर भी उत्पादन बढ़कर मिला.