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शेड्यूल (चना, हरभरा ) चने की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का उपयोग कैसे करे |

 चना, हरभरा. चने की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ.    निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    1) चने के बीजों को बीजोपचार करना है.प्रति किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी मिलाकर बीजों को हाथ से हलाने से बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर बाद बुवाई कर सकते हैं. २) बुवाई करते समय डाले जानेवाले रासायनिक खाद में दो किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है. ३) चने की फसल में मल्टीप्लायर देने से फसल की ग्रोथ जबरदस्त होती है, शाखाओं की संख्या बढ़ती है, शाखा की प्रत्येक पत्ती के पास फूल लगता है, कई किसान भाइयों ने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करके डबल से ज्यादा उत्पादन लिया है. ४) मिटटी से उत्पन्न होनेवाले रोगों के कारण फसल में मर रोग समस्या आती है, कंपनी प्रतिनिधि से ट्रायकोडर्मा खेत पर तैयार करने की जानकारी लें, एक एकड़ का खर्चा 40 रुपये आता है. ५) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ६) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प...

शेड्यूल तरबूज-खरबूज-खीरा ककड़ी.

 तरबूज-खरबूज-खीरा ककड़ी. तरबूज,खरबूज,खीरा ककड़ी की खेती मल्टीप्लायर तकनीक से करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद पर दो किलो मल्टीप्लायर कोटिंग करके देना है. २) उपरोक्त फसलों में मर रोग की समस्या आ सकती है, उससे बचाव के लिए कंपनी प्रतिनिधि से जानकारी लेकर ट्रायकोडर्मा ट्रीटमेंट करना है, प्रति एकड़ 40 रुपये का खर्चा आता है. ३) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ४) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ५) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग प्रत्येक इस्तेमाल के बाद कम-कम होते जाएंगे. 

शेडयूल मोसम्बी-संतरा-निम्बू-सीताफल,शरीफा-किन्नू-अमरुद,पेरू,जाम-बोर,एप्पल बोर.

 मोसम्बी-संतरा-निम्बू-सीताफल,शरीफा-किन्नू-अमरुद,पेरू,जाम-बोर,एप्पल बोर. की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न शेड्यूल एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद में चार किलो मल्टीप्लायर कोटिंग करके देना है. २) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ३) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ४) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा.

शेडयूल तूर (अरहर) मसूर-उड़द-मूंग.

 तूर (अरहर) मसूर-उड़द-मूंग. दलहन फसलों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    १) बुवाई करने के पूर्व बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचारित करें, बीजोपचार करने के लिए एक किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी मिलाकर बीजों को हाथ से हलाने से बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर बाद बुवाई कर सकते हैं. २) रासायनिक खाद देते समय अरहर (तूर डाल) के लिए दो किलो मल्टीप्लायर रासायनिक खाद पर कोटिंग करके देना है, मसूर,उड़द और मूंग के लिए रासायनिक खाद पर एक किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है.   ३) मसूर उड़द और मूंग दाल की फसल में कभी-कभी फफूंद (फंगस) का अटेक आता है, उससे उत्पादन प्रभावित होता है,  फसल पर फफूंद आने के पहले या बाद में कृष्णा ऑल क्लियर का छिड़काव करिये. ४) मल्टीप्लायर फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता कराता है, इसलिए फसल के पत्तों का साइज बड़ा बनता है, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बनता है, फसल सूर्यउर्जा की मदत से ज्यादा भोजन बनाती है. ५) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो,...

शेडयूल केला

 केला. केले की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक हजार पौधों के लिए है. १) अगर आप केले के कंद लगा रहे हों, तब 10 लीटर पानी में 50 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर केले के कंद उसमें डुबाकर लगाएं. 2) केले के पौधे या कंद खेत में लगाने के बाद 1000 पौधों के लिए 200 लीटर पानी में एक किलो मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक पौधे के रूट झोन में 200 मिली घोल डालना है. ३) जब पौधों को रासायनिक खाद देना हो, तब रासायनिक खाद पर चार किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है. ४) रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण 20 प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा. ५) मिटटी से उत्पन्न होनेवाले रोगों के कारण फसल में मर रोग समस्या आती है, कंपनी प्रतिनिधि से ट्रायकोडर्मा खेत पर तैयार करने की जानकारी लें, एक एकड़ का खर्चा 40 रुपये आता है. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से 5 से 7 साल में रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाता है, सम्पूर्ण खेती आर्गनिक बन जाती है, जिस दिन से मल्टीप्लायर तकनीक का इस...

शेडयूल पपीता, पपई.

 पपीता, पपई. पपीता (पपई) की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) पपीते के पौधे खेत में लगाते समय 200 लीटर पानी में एक किलो मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक पौधे के पास 200 मिली घोल डालना है. २) पौधों को रासायनिक खाद देते समय खाद पर चार किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है. ३) उपरोक्त ट्रीटमेंट से पौधों को आवश्यकता से अधिक भोजन मिलेगा, इसलिए व्हायरस से फसल का बचाव होगा. ४) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ५) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग समस्या कम-...

शेडयूल आलू (बटाटा) गाजर-बीट (चुकंदर) प्याज (कांदा) लस्सन (लहसुन) रतालू-अरबी (अरवी,अरुम) सुरन,जमीकंद.

 आलू (बटाटा) गाजर-बीट (चुकंदर) प्याज (कांदा) लस्सन (लहसुन) रतालू-अरबी (अरवी,अरुम) सुरन,जमीकंद. मिटटी के अंदर लगनेवाली सब्जियों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) बीजों को मल्टीप्लायर से बीजोपचारित करके लगाना है, बीजोपचार करने के लिए एक किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर बीजों के साथ रगड़ना है, सभी बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर के बाद लगा सकते हैं. २) कंद लगाने के पहले 10 लीटर पानी में 50 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर उसमें कंद डुबाकर लगाना है. ३) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद पर २ किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है. ४) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ५) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने ...