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Showing posts from July, 2022

अनिल कुलकर्णी सर का कहना है की, मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से जहरीली दवाओं के खर्च में बचत आई है!

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  १) अनिल कुलकर्णी सर सब्जी भाजी की आर्गनिक खेती करते हैं, सातारा जिले में आर्गनिक सब्जी भाजी का बहोत बड़ा मार्केट है, 9000 एकड़ क्षेत्र पर आर्गनिक सब्जी की खेती होती है, उन किसान भाइयों के मार्गदर्शक हैं अनिल कुलकर्णी सर. २) शिरीष शिगवन सर को जब कुलकर्णी सर के आर्गनिक कार्यों की जानकारी हुई, उन्होंने तुरंत कुलकर्णी सर से मुलाक़ात करके मल्टीप्लायर की जानकारी दी, कुलकर्णी सर ने सबसे पहले भिन्डी की फसल पर मल्टीप्लायर के रिझल्ट लिए, सर का कहना है कि, मल्टीप्लायर से फसल कि ग्रोथ अच्छी होती है, उत्पादन अच्छा और ज्यादा मिलता है, सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि फसल कि प्रतीकरशक्ति बढ़ जाती है, इसलिए जहरीली दवाओं पर होनेवाला खर्च बचता है. ३) कराड शहर में कुलकर्णी सर का आर्गनिक सब्जी भाजी बिक्री का केंद्र है, हजारों नागरिक विशवास के साथ खरेदी करते है, अभी उन्होंने लौकी कि फसल में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, उसमें भी उनको समाधानकारक रिझल्ट मिले हैं. ४) कुलकर्णी सर अब मल्टीप्लायर कि कार्यक्षमता से पूरी तरह से संतुष्ट हैं, अब उन्होंने 9000 एकड़ के क्षेत्र पर मल्टीप्लायर का इस्तेमाल सुरु करने का निश्च...

अमरूद के पौधे एक साल के ग्रोथ दो साल जैसी.

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  १) श्री राजेंद्रकुमार शर्मा ग्राम बंदेड्या तहसील चौथ का बरवाड़ा जिला सवाई माधोपुर राजस्थान. २) मार्गदर्शक तथा विक्रेता -श्री कन्हैयालाल प्रजापत सर. ३) अमरुद का बगीचा ( जाम, पेरू.) ४) किसान भाई पेशे से शिक्षक हैं, इन्होने अमरुद के 600 पेड़ लगाए हैं. ५) पौधे लगाने के 03 महीने बाद से मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल सुरु किया. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से जब पौधे तेजी से बढ़ने लगे, उन्होंने रासायनिक खाद 40% कम कर दिया. ७) अभी बगीचा एक साल का हुआ है, पौधों की ग्रोथ देखकर सभी किसान भाई उसे दो साल का मानते हैं. ८) बगीचे की ग्रोथ उसकी पत्तों का जम्बो आकार देखने के लिए दूर-दूर से किसान भाई आ रहे हैं. ९) सिर्फ एक बार किड रोग की समस्या आई थी, कंपनी प्रतिनिधि कन्हैयालाल सर ने नारायणअस्त्र का छिड़काव करवाया समस्या समाप्त हो गई.

जाम (पेरू) के बगीचे का कायापलट हो गया.

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  1) किसान भाई का नाम आगाज खान ग्राम गंगापुर जिला नाशिक महाराष्ट्र, इनको कंपनी के प्रतिनिधि किरण नामदेव गावंडे सर ने बताया की, फल बाग़ से पैसा कमाना है, तब फलों का आकार जम्बो मिलना चाहिए, मल्टीप्लायर तकनीक से डबल पैसा बनाया जा सकता है. 2) किसान भाई के पास जाम के 500 पेड़ हैं, उन्होंने किरण सर के मार्गदर्शन में प्रति पेड़ 50 ग्राम मल्टीप्लायर रासायनिक खाद पोटाश में मिलाकर दिया. 3) आठ दिन के अंतर से 600 लीटर पानी में 600 ग्राम मल्टीप्लायर + 200 मिली कृष्णा ऑल क्लियर + 40 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर पौधों पर 2 बार छिड़काव किया. ४) पौधों में पत्तों की संख्या ज्यादा मिली, पत्तों का आकार जम्बो मिला, फल बाग में जब तक पत्तों का आकार नहीं बढ़ता तब तक फल बड़े आकार के नहीं बनते. ५) फल जम्बो आकार के मिलने से भाव डबल तक बढ़कर मिलेगा.

पेरू, अमरूद की बाग़ में मल्टीप्लायर तकनीक से सभी प्रकार के पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं.

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पेरू,अमरूद की बाग़ में मल्टीप्लायर तकनीक से सभी प्रकार के पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं.  १) किसान भाई का नाम हनीफ पटेल ग्राम सौंसर (पांढुर्णा) मध्यप्रदेश, हनीफ पटेल साहब एक सफल बिजनेस मेन हैं, उनका और खेती का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं. २) उनके पास ढाई एकड़ जमीन थी जिस पर कभी खेती नहीं हुई, उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधि हिमांशु मिश्रा सर के मार्गदर्शन में उस जमीन पर खेती करने का निश्चय किया, खेती में क्या लगाना है, इसकी जवाबदारी हिमांशु सर को दी. ३)अनार (डाळिंब),निम्बू, सुरजने की फली (सहजन) अमरुद (पेरू-जाम) इत्यादि पौधे लगाए. ४) पौधे लगाने के बाद थोड़े प्रमाण में रासायनिक खाद में १ किलो मल्टीप्लायर मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र में दिया. ५) प्रत्येक ८ दिन के अंतर से २५० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से पानी के साथ दिया जा रहा है. ६) प्रत्येक ८ दिन के अंतर से पौधों पर १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर छिड़काव किया जा रहा है. ७) पौधे ३ महीने के हो चुके हैं सभी पौधों की ग्रोथ जबरदस्त है.

जीरा फसल में, शाखाओं की संख्या ज्यादा मिलने से उत्पादन बढ़कर मिलना है!

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  १) किसान भाई का नाम हरदेवसिंह द्वारकापूरी, इनको कंपनी के प्रतिनिधि हिमांशु मिश्रा सर ने ज्यादा ठंडी में जीरे की फसल मरने से बचाने के लिए तथा अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने की सलाह दी. २) मल्टीप्लायर फसल का सम्बन्ध प्रकृति से जोड़ देता है, इसलिए ज्यादा ठंडी या ज्यादा गर्मी में भी फसल का कोई नुकसान नहीं होता. ३) किसान भाई १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक ८ दिन के अंतर से छिड़काव किया. ४) मल्टीप्लायर के छिड़काव से फसल की ग्रोथ तथा गहरा हरा रंग बना रहा इसलिए दूसरे किसी उत्पादन का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा. ५) अप्रतिम रिझल्ट मिले हैं, प्रत्येक पौधे में शाखाओं की संख्या ज्यादा मिलने से उत्पादन बढ़कर मिलना है.

जीरा, Jeera फसल की ग्रोथ लगातार बनी हुई है.ब्रांचिंग ज्यादा होने के कारण उत्पादन बढ़कर मिलेगा.

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  १) किसान भाई का नाम चंदूलाल जरसनिया थाना पिंपली तहसील बांथली जूनागढ़, चंदूलाल सर स्वयं कंपनी के प्रतिनिधि हैं. २) चंदूलाल सर ने ८ एकड़ क्षेत्र पर जीरा लगाया है. ३) प्रति एकड़ १ किलो मल्टीप्लायर पानी भरते समय पानी के साथ दिया है. ४) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर ४ बार फसल पर छिड़काव किया है. ५) मल्टीप्लायर के कारण अधिक मात्रा में भोजन मिलने से फसल की ग्रोथ लगातार बनी हुई है, फसल का रंग गहरा हरा है, अभी तक किसी भी प्रकार की दवा का छिड़काव नहीं करना पड़ा, ब्रांचिंग ज्यादा होने के कारण उत्पादन बढ़कर मिलेगा.

ज्वार का कणिस (भुट्टा) देखने लायक.

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  १) किसान भाई का नाम दीपक गिबिडे हदगांव जिला नांदेड़, इन्होने ज्वार की फसल लगाईं थी, मल्टीप्लायर के इस्तेमाल की पूरी जानकारी सतीश माली सर से लेकर उन्होंने ४० प्रतिसत रासायनिक खाद कम डालकर मल्टीप्लायर के साथ खेती की. २) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर ३ बार फसल पर पत्ते गीले हों ऐसा छिड़काव किया. ३) गोबर खाद में १ किलो मल्टीप्लायर मिलाकर १ एकड़ खेत में दिया, ऐसा २ बार दिया. ४) मल्टीप्लायर के कारण प्रकृति से बिनामूल्य भोजन मिलने लगा, फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता हो जाने के कारण उत्पादन बढ़कर मिलना ही था. ५) आप फोटो में देख सकते हैं, ज्वारी के दानों से भरे बड़े-बड़े कणिस दिख रहे हैं.

ज्वार, ज्वारी. ब्रम्हास्त्र है मल्टीप्लायर.

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१) किसान भाई नहीं चाहता किसी को जहर खिलाना, परंतु रासायनिक खाद के बगेर खेती करना असंभव होने के कारण रासायनिक खाद डालना पड़ता है. २) जिनके पास मल्टीप्लायर नाम का ब्रम्हास्त्र है, उनको अब किसी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, बिलकुल आसान है मल्टीप्लायर के साथ आर्गनिक फार्मिंग. ३) कंपनी की डीलर अश्विनी प्रकाश राउत मेडम ने किसान भाई शिवाजीराव माली ग्राम परली वैजनाथ जिला बीड, इनको मल्टीप्लायर की मदत से आर्गनिक खेती की जानकारी दी. ४) किसान भाई ने २ एकड़ क्षेत्र पर ज्वार की फसल के बीजों का २०० ग्राम मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचार किया इसके कारण ज्यादा से ज्यादा संख्या में बीज उग आये. ५) बुवाई करने के पहले २० बैलगाड़ी गोबर का खाद २ एकड़ क्षेत्र में डाल दिया, फसल पर दो बार १५ लीटर पानी में ३० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया.   ६) फसल के फोटो आप झूम करके देखिये, रासायनिक के मुकाबले उत्पादन में कमी नहीं आएगी, किसान भाई अगर सीधे ग्राहक को बेचे तो ५० प्रतिसत ज्यादा पैसा मिल सकता है.  

ज्वारी, ज्वार देखते ही देखते फसल का रंगरूप बदल गया.

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  १) किसान बहन नयनाबा इनकी खेती कड़ा तहसील विसनगर जिला महेसाणा गुजरात में है, इन्होने ज्वार की फसल लगाईं थी, फसल पिली पड रही थी, अनेक उपाय असफल होने के बाद कंपनी के डीलर कीर्तिसिंग चावड़ा सर की सलाह से मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. २) किसान बहन ने यूरिया में मल्टीप्लायर मिलाकर रगड़कर यूरिया काला-काला हो जाने पर खेत में छिड़काव किया. ३) पानी भरते समय पानी के साथ भी मल्टीप्लायर दिया, मल्टीप्लायर ने फसल को आवश्यक भोजन मिलने की व्यवस्था निर्माण की, और देखते ही देखते फसल का रंगरूप बदल गया. ४) मल्टीप्लायर के इस्तेमाल के पहले का तथा बाद के दोनों फोटो दिए हैं, फसल तेजी से बढ़ना प्रारम्भ हो गई है, पूरी फसल हरी-हरी बन गई है. ५) अब किसान बहन का कहना है की, फसल का रंग रूप देखकर निश्चित मुझे जहाँ फसल मरने को आ गई थी,अच्छा उत्पादन मिलने की स्तिथि बन गई है.

ज्वारी की ऊंचाई ११ फुट से ज्यादा दिख रही है.

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  १) विजय सिंह सर कंपनी के बिजनेस कोआर्डिनेटर हैं, इनकी स्वयं की खेती है ग्राम नाथुवास जिला भिवानी हरयाणा में है. २) विजय सर कंपनी के काम के साथ खेती का काम भी देखते हैं, उन्होंने चारे के लिए ज्वार लगाईं थी, एकड़ में १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया. ३) फसल पर १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया, इसके आलावा एक दाना भी रासायनिक खाद का नहीं डाला है, उसके बावजूद ज्वारी की ऊंचाई ११ फुट से ज्यादा दिख रही है, उसका स्टंप भी जबरदस्त जाडा है, विजय सर मशीन में कुट्टी बनाकर खिलाते हैं.

ज्वारी, ज्वार मल्टीप्लायर तकनीक ने सभी फसलों के उत्पादन को ६० प्रतिसत से बढ़ा दिया.

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ज्वारी, ज्वार मल्टीप्लायर तकनीक ने सभी फसलों के उत्पादन को ६० प्रतिसत से बढ़ा दिया.   १) रात के समय हम सिर्फ अपने घर में उजाला करने पर बहोत सारा पैसा खर्च कर देते हैं, जबकि प्रकृति सूर्य की मदत से पृथ्वी के कोने-कोने में उजाला कर देती है, जिसके लिए हमें कोई खर्च नहीं करना पड़ता, इसलिए प्रकृति जिस काम को करने के लिए सक्षम है, उस पर हम पैसा क्यों व्यर्थ करें. २) प्रकृति जब जंगल में पेड़ पौधों को बिनामुल्य भोजन प्रदान कर रही है, फिर हमारे खेतों में हम क्यों भोजन की व्यवस्था बनाने में कंगाल हो रहे हैं, मल्टीप्लायर की मदत से प्रकृति की भोजन प्रदान करने की प्रणाली को कार्यरत करके हम खेती में आनेवाली सभी समस्याओं तथा खर्चों की बचत कर सकते हैं. ३) मधुकर परळकर इनकी खेती उमरगा जिला उस्मानाबाद में है, इन्होंने ज्वारी, चना तथा गेहूं की फसल बुवाई करने के पहले बीजों को मल्टीप्लायर से उपचारित किया, फायदा यह हुआ की ज्यादा से ज्यादा संख्या में बीज अंकुरित हुए तथा तेजी से बढ़ने लगे. ४) फसल १५ दिन की होने पर १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर दो बार छिड़काव किया, बाद में पानी भरते समय २०० ग्र...

भोपला, कद्दू, का उत्पादन ३ गुना हो गया!

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  1. किसान भाई का नाम विनीत कुमार ग्राम पैलावर पोस्ट राजपुर तहसील सिकंदरा ज़िला कानपुर देहात उत्तरप्रदेश। 2. कम्पनी के प्रतिनिधि जी.एल सिंग सर ने मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से अधिक उत्पादन लेने की तकनीक बताई। 3. किसान भाई ने सिर्फ़ ५०० ग्राम मल्टीप्लायर का छिड़काव और ज़मीन से देने में इस्तेमाल किया। 4. पहले किसान भाई जितनी जगह से १२ से १५ क्विंटल कद्दू का उत्पादन लेता था उतनी ही जगह में उसे ४० क्विंटल उत्पादन मि ला।

भोपला, कद्दू को ग्राहक खेत में आकर खरेदीकर ले जा रहे हैं!

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१) जे.एस बघेल साहब को किसान भाई कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि बघेल साहब लोक निर्माण विभाग में अधिकारी हैं, कभी-कभी खेत पर जाते हैं, इन्होने ग्राम पलारी जिला सिवनी मध्यप्रदेश में कंपनी के बिजनेस कोआर्डिनेटर हिमांशु मिश्रा सर के मार्गदर्शन में कुम्हड़ा की फसल लगाई, जिसमें १ दाना भी रासायनिक खाद का ना डालने का निर्णय लेकर सिर्फ मल्टीप्लायर से आर्गनिक खेती की. २) प्रत्येक ८ दिन के अंतर से २५० ग्राम मल्टीप्लायर जमीन से दिया है तथा प्रत्येक ७ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया है. ३) बेल की ग्रोथ हमेशा के मुकाबले काफी तेज रही, कुछ ही समय में खेत भर गया, पाँव रखने के लिए जगह ढूंढना पड़ती है. ४) फलों की संख्या भी ज्यादा है और फल तेजी से बढ़ रहे हैं, बघेल साहब को उत्पादन बेचने के लिए शायद मंडी में न जाना पड़े, ग्राहक खेत से आकर उत्पादन लेकर जा रहे हैं.

तम्बाखू उत्पादन में ५० प्रतिसत की बढ़त.

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  १) तम्बाकू की खेती में पत्तों का आकार जितना बड़ा बनेगा उत्पादन उतना ही ज्यादा मिलेगा, पत्तों का आकार तभी बढ़ेगा जब फसल को उसकी आवश्यकता के अनुरूप भोजन की उपलब्धता होगी, मल्टीप्लायर प्रकृति द्वारा दिया जानेवाला बिनामुल्य भोजन मिला देने में सक्षम होने के कारण मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होनेवाली फसलों को भोजन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता. २) रूपेश सबागोंड़ा पाटील ग्राम भिवाशी तहसील चिकोडी जिला बेलगाम कर्णाटक, स्वयम कंपनी के डीलर हैं, इन्होंने सव्वा दो एकड़ क्षेत्र में तम्बाकू की फसल में मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने का निश्चय करके, फसल लगाते समय एक एकड़ क्षेत्र के लिए रासायनिक खाद के साथ १ किलो मल्टीप्लायर दिया. ३) दो बार पानी देते समय प्रति एकड़ १५० ग्राम मल्टीप्लायर दिया, १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर ५ बार छिड़काव किया. ४) फसल पहले ही दिन से आस-पड़ोस के सभी खेतों की फसलों से आगे रही, पत्तों का आकार बड़ा बन गया, पहले १ एकड़ में ९०० किलो तक उत्पादन मिलता था, इस बार १४०० किलो तक उत्पादन मिलेगा ऐसा रूपेश सर का कहना है.

तम्बाखू की फसल में फसल बलवान बन गई ग्रोथ तेज है.

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  १) किसान भाई का नाम संजयकुमार सोढा ग्राम अरेरा जिला खेड़ा, इनको कंपनी के प्रतिनिधि निरवकुमार सर ने मल्टीप्लायर के साथ ज्यादा उत्पादन लेने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने तम्बाकू की फसल में पानी भरते समय ५०० ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ दिया. ३) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर २ बार फसल पर छिड़काव किया. ४) मल्टीप्लायर के कारण फसल को प्रकृति से बिनामूल्य भोजन मिलने लगा, फसल बलवान बन गई, ग्रोथ तेज है और किटक तथा रोगों की समस्या भी नहीं है.

तम्बाखू फसल में जहरीली दवाओं के खर्च में भी बचत हुई.

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  १) किसान भाई का नाम गोविन्दभाई चव्हाण ग्राम वनसोल जिला खेड़ा, इनको कंपनी के प्रतिनिधि निरवकुमार चव्हाण सर ने मल्टीप्लायर की ताकत तथा उपयोगिता जानने के लिए फार्मर च्वाइस का पैकेट १ एकड़ क्षेत्र में इस्तेमाल करने की सलाह दी. २) किसान भाई ने ५०० ग्राम मल्टीप्लायर खेत में पानी भरते समय पानी के साथ दिया. ३) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर २ बार फसल पर छिड़काव किया. ४) फसल की ग्रोथ तेज है, किड और रोग की समस्या नहीं है, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बना हुआ है. ५) निरवकुमार सर का कहना है की, फार्मर च्वाइस पैकेट का इस्तेमाल करने से दूसरे सभी खर्चों की बचत हुई, जहरीली दवाओं के खर्च में भी बचत हुई.

तम्बाखू फसल में पत्तों का आकार तथा ऊंचाई तेजी से बढ़ने लगी

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  १) किसान भाई का नाम कपूर ठाकोर ग्राम बोरतवाड़ा तहसील हारिज जिला पाटन, इनको कंपनी के प्रतिनिधि महेशकुमार ठाकोर सर ने मल्टीप्लायर की मदत से तम्बाकू के जम्बो आकर के पत्ते लेने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने ८० बीघा क्षेत्र में तम्बाकू की फसल लगाईं थी, महेश कुमार ठाकोर सर की सलाह अनुसार ३ बार मल्टीप्लायर यूरिया में मिलाकर दिया. ३) ८० बीघा क्षेत्र में २० किलो मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. ४) मल्टीप्लायर के कारण फसल को प्रकृति द्वारा बिनामूल्य भोजन सहजता से उपलब्ध होने लगा, इसलिए फसल के पत्तों का आकार तथा ऊंचाई तेजी से बढ़ने लगी. ५) महेश कुमार सर का कहना है की, पिछले सभी उत्पादनों का रेकार्ड ब्रेक होगा.

वाटाणा फसल गहरे हरे रंग की बन गई,रुकी हुई ग्रोथ फिर से सुरु हो गई.

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  १) किसान भाई का नाम हशरत अली गाजियाबाद, इनको कंपनी के प्रतिनिधि सेवा निवृत्त कृषि अधिकारी बंसीलाल माली सर ने मल्टीप्लायर के साथ फायदे की खेती करने की तकनीक बताई. २) किसान भाई की मटर की फसल थोड़ी पिली पड़ रही थी और उत्पादन भी कम मिल रहा था. ३) बंसीलाल सर ने किसान भाई को बताये अनुसार किसान भाई ने ५०० ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ जमीन से दिया. ४) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर फसल पर २ बार छिड़काव किया. ५) फसल में तुरंत सुधार दिखने लगा, कुछ ही दिनों में फसल गहरे हरे रंग की बन गई, रुकी हुई ग्रोथ फिर से सुरु हो गई. ६) बंसीलाल सर ने बताया की उत्पादन काफी कम हो गया था, मल्टीप्लायर की ट्रीटमेंट के बाद उत्पादन पहले के मुकाबले ज्यादा मिल रहा है.

मल्टीप्लायर ने मिटटी को प्राकृतिक बनाया और फसल लहलहाने लगी.

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  १) खेती की पूरी व्यवस्था मिटटी पर आधारित है, जिस खेत की मिटटी जितनी उपजाऊ, फसल की पैदावार उतनी ज्यादा, जिस खेत की मिटटी जितनी ख़राब, फसल की पैदावार उतनी कम, इतना ही नहीं, उपजाऊ मिटटी में कम खर्चा करके उत्पादन ज्यादा मिलता है, और ख़राब मिटटी में ज्यादा खर्च करके भी उत्पादन कम ही मिलता है. २) मतलब दोस्तों, खेती में सबसे महत्वपूर्ण है मिटटी, मिटटी में एक प्राकृतिक व्यवस्था कार्यरत है जो आपकी फसलों का पोषण करती है, वह व्यवस्था रासायनिक खादों के इस्तेमाल से अकार्यरत हो गई है, जिसे हम अच्छी या उपजाऊ मिटटी कहते हैं, वह कम प्रमाण में ख़राब हुई है, हमें खेती से अच्छा तथा किड रोग मुक्त उत्पादन लेने के लिए मिटटी को बलवान बनाना पड़ेगा. ३) महेश पाटीदार ग्राम टकरावद तहसील मल्हारगढ़ जिला मंदसौर मध्यप्रदेश, इन्होंने अफीम की खेती में मल्टीप्लायर की ताकत का अनुभव करने के बाद, मटर की फसल में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, १ एकड़ में १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया, १५ दिन के बाद प्रत्येक ८ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया है. ४) मल्टीप्लायर ने प्रकृति की फसल को पोष...