मल्टीप्लायर ने मिटटी को प्राकृतिक बनाया और फसल लहलहाने लगी.
१) खेती की पूरी व्यवस्था मिटटी पर आधारित है, जिस खेत की मिटटी जितनी उपजाऊ, फसल की पैदावार उतनी ज्यादा, जिस खेत की मिटटी जितनी ख़राब, फसल की पैदावार उतनी कम, इतना ही नहीं, उपजाऊ मिटटी में कम खर्चा करके उत्पादन ज्यादा मिलता है, और ख़राब मिटटी में ज्यादा खर्च करके भी उत्पादन कम ही मिलता है.
२) मतलब दोस्तों, खेती में सबसे महत्वपूर्ण है मिटटी, मिटटी में एक प्राकृतिक व्यवस्था कार्यरत है जो आपकी फसलों का पोषण करती है, वह व्यवस्था रासायनिक खादों के इस्तेमाल से अकार्यरत हो गई है, जिसे हम अच्छी या उपजाऊ मिटटी कहते हैं, वह कम प्रमाण में ख़राब हुई है, हमें खेती से अच्छा तथा किड रोग मुक्त उत्पादन लेने के लिए मिटटी को बलवान बनाना पड़ेगा. ३) महेश पाटीदार ग्राम टकरावद तहसील मल्हारगढ़ जिला मंदसौर मध्यप्रदेश, इन्होंने अफीम की खेती में मल्टीप्लायर की ताकत का अनुभव करने के बाद, मटर की फसल में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, १ एकड़ में १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया, १५ दिन के बाद प्रत्येक ८ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया है. ४) मल्टीप्लायर ने प्रकृति की फसल को पोषण देनेवाली प्रणाली कार्यरत कर देने से फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता होने लगी, अभी किसान भाई ने दो बार हार्वेस्टिंग की है, प्रत्येक पौधे पर ३० से ४० फलियां हैं, किसान भाई का कहना है की, मार्च की समाप्ति तक अविरत हार्वेस्टिंग होती रहेगी. ५) उत्पादन की गुणवत्ता भी अच्छी है, और ज्यादा मात्रा में मिलने की सम्भावना है, किसान भाई को कम से कम खर्च में बढ़ हुआ उत्पादन लेने का सम्पूर्ण मार्गदर्शन कम्पनी के बिजनेस कोआर्डिनेटर नंदकिशोर पाटीदार सर ने किया है.

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