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Showing posts from January, 2023

शिमला मिर्ची की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।

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शिमला मिर्ची की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।       १) किसान भाई का नाम श्री अरुण परशराम मेरत ग्राम बालसमुंद्र तहसील शिंदखेडराजा जिला बुलढाणा महाराष्ट्र।  २) शिमला मिर्ची की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया है। ३) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई है, एक-एक पौधे पर दो से तीन किलो मिर्ची तैयार हो रही है।  ४) अरुण सर का कहना है की, मल्टीप्लायर तकनीक से मिर्ची का साईज बड़ा मिल रहा है।  ५) अभी प्रति फल का वजन 250 से 300 ग्राम है, उनकी कोशिश 600 ग्राम वजन का फल तैयार करने की है।

मूली,मुळा.उत्पादन क्वालिटी बेहतर होने के कारण बाजार में भाव ज्यादा मिला.

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 मूली,मुळा. १) किसान भाई का नाम चंद्रशेखर वाघ सटाना जिला नाशिक, इनको कंपनी के प्रतिनिधि सुनील शिरोडे सर ने मल्टीप्लायर की मदत से कम खर्च में ज्यादा उत्पादन लेने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने १० आर क्षेत्र में मूली की फसल लगाईं थी. ३) २५० ग्राम मल्टीप्लायर पानी खेत में भरते समय पानी के साथ २ बार दिया. ४) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर २ बार फसल पर छिड़काव किया. ५) मूली की फसल में रस चूसनेवाले किटक ज्यादा आते हैं, इस फसल पर रासायनिक दवाओं का एक भी छिड़काव नहीं करना पड़ा. ६) उत्पादन क्वालिटी बेहतर होने के कारण बाजार में भाव ज्यादा मिला.

उत्पादित निम्बू का रिजल्ट देखकर पतंजलि ने पसंद किया मल्टीप्लायर तकनीक को..!!

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उत्पादित निम्बू का रिजल्ट देखकर पतंजलि ने पसंद किया मल्टीप्लायर तकनीक को..!! १) किसान भाई जैविक पद्धति से निम्बू कि खेती करना चाहता था, इसलिए उन्होंने रासायनिक खाद का एक दाना भी नहीं डाला, निम्बू के पौधे पीले पड़ने लगे, सभी पत्तियां पिली हो गई, पौधों की ग्रोथ थम सी गई, किसान भाई परेशान करे तो क्या करे. २) किसान भाई का नाम है महेश खंडेलवाल, इनकी खेती अमझेरा जिला धार मध्यप्रदेश में है, इन्होंने भरूच गुजरात से थाईलैंड जाती के निम्बू के ५०० पौधे मंगाए, उसके बाद एक और किसान भाई ने ५०० और किसान भाई राजकुमार मालवी ने ४५०० पौधे लगाए. ३) खेती पूरी तरह से जैविक होने के कारण रासायनिक खाद नहीं डाला था, पौधों को आवश्यक मात्रा में भोजन नहीं मिलने के कारण किड का अटेक हो गया था, किटकों ने पत्तों से रस चूस लेने के कारण पत्ते पीले पड़ रहे थे, ग्रोथ पूरी तरह से रुक गई थी. ४) लगभग डेड महीने पहले महेश खंडेलवाल सर ने मल्टीप्लायर मंगवाकर उसे जमीन से दिया और उसका छिड़काव किया, आज पुरे बगीचे के पत्ते हरे-हरे हो गए हैं, नए फूल लग रहे हैं, पौधों के बढ़ने की गति तेज हो गई है. ५) किसान भाई राजकुमार मालवी साहब ने ४५०० ...

मल्टीप्लायर तकनीक से परवल फसल का उत्पादन डबल से ज्यादा हो गया..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से परवल फसल का उत्पादन डबल से ज्यादा हो गया..!! इस्तेमाल का निर्णय लिया किसान भाई ने, कमाल किया मल्टीप्लायर तकनीक ने..!! १) परवल की खेती में १ एकड़ में ४०० किलो तक परवल निकलती है, किसान भाई कांतिलाल पटेल ने मल्टीप्लायर की मदत से ९०० किलो परवल लेना सुरु किया है, दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है की परवल पीली नहीं हो रही, गर्मी के मौसम में परवल उत्पादन करनेवाले सभी किसान भाई परवल पीली पड़ने से परेशान रहते है, क्योंकि जितनी परवल पीली निकलती है, उसे फेक देना पड़ता है, कांतिलाल भाई के खेत में नाममात्र कुछ परवल पीली नजर आये, ९५ टक्के माल हरा था | २) दिग्विजय महिदा सर खेती से सम्बंधित उत्पादन बेचते है, हजारों किसान भाई उनसे खेती के उत्पाद तथा सलाह लेते है, कांतिलाल पटेल साहब की असनाड तहसील ओलपाड जिला सूरत गुजरात में खेती है, कम से कम १ एकड़ परवल हर साल लगाते है, परवल निकालना सुरु होने के बाद भी उत्पादन बढ़ नहीं रहा था, इसलिए उन्होंने मल्टीप्लायर का छिड़काव कराया | ३) पहला छिड़काव होने के बाद फसल के पत्ते डार्क ग्रीन कलर के बन गए, पत्तों की संख्या बढ़ने लगी, ज्यादा फूल आने लगे, उत्...

केसर फसल को देखकर किसान भाई बहोत खुश है.

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 केशर, केसर,                                            .                               केशर की खेती मल्टीप्लायर के साथ. १) किसान भाई का नाम अशोक कुमार ग्राम नांगल जिला महेंद्रगढ़ हरयाणा, अशोककुमार सर स्वयं कंपनी के प्रतिनिधि हैं. २) इन्होने आधा एकड़ क्षेत्र पर केशर लगाईं ५०० ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ दिया. ३) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर ३ बार फसल पर छिड़काव किया. ४) मल्टीप्लायर के कारण फसल को प्राकृतिक भोजन बिनामूल्य मिलने लगा, इसलिए फसल का तेजी से सर्वांगीण विकास तथा ग्रोथ हुई. ५) किसान भाई फसल को देखकर बहोत खुश है.

मल्टीप्लायर तकनीक से १० गुंठे खेत में एक दिन आड़ १०० किलो फूल का उत्पादन..!!

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गेंदे का फूल  मल्टीप्लायर तकनीक से १० गुंठे खेत में एक दिन आड़ १०० किलो फूल का उत्पादन..!! १) फूलों की खेती कठिन खेती मानी जाती है, क्योंकि किसी भी कारण से उत्पादन पर परिणाम हो जाता है, किटक तथा रोग भी परेशान करते रहते है, किसान भाई जितने का फूल बेचता है, उसमें से ५० टक्के रकम खाद, जहरीली दवाइयाँ तथा टॉनिक की खरेदी में खर्च हो जाती हैं. २) मल्टीप्लायर के साथ खेती का फायदा उठाया है, ग्राम तलसंदे जिला कोल्हापुर महाराष्ट्र के सुजीत कुमार शिंदे साहब ने इन्होंने इसके पहले की फसल में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया था, इसलिए मल्टीप्लायर की ताकत से शिंदे साहब परिचित थे. ३) इसलिए इस बार गेंदे की खेती में एक दाना भी रासायनिक खाद का नहीं डालने का निश्चय करके १० गुंठे क्षेत्र में गेंदे की खेती सुरु की, ड्रिप सिस्टम से मल्टीप्लायर दिया, पौधे छोटे थे तब ड्रेंचिंग किया, और समय-समय पर छिड़काव किया, फूलों का उत्पादन सुरु होने के बाद से छिड़काव बंद कर दिया है. ४) प्रत्येक एक दिन के अंतर से १०० किलो फूलों का उत्पादन मिल रहा है, खाद का खर्च शून्य है, जहरीली दवाओं के खर्च में ८० प्रतिसत पैसे की बचत हुई, इसे...