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Showing posts from May, 2022

कपास की फसल में कैरी की संख्या गिनते-गिनते थक जायेंगे !

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  कैरी की संख्या गिनते-गिनते थक जायेंगे. १) किसान भाई का नाम नीलेश बनसोड ग्राम पिंपलखुंटा तहसील बाभूलगांव जिला यवतमाल, इन्होने १० एकड़ कपास लगाईं थी, कंपनी के प्रतिनिधि नकुल वसंतराव मड़गे सर ने किसान भाई को बताया की, फसलों को पोषण प्रकृति के द्वारा मिलता है, रासायनिक खादों के इस्तेमाल से वह व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, आप मल्टीप्लायर की मदत से अपनी खेती को प्राकृतिक बनाकर खेती का लागत मूल्य कम करके ज्यादा उत्पादन ले सकते हैं. २) किसान भाई ने १ किलो मल्टीप्लायर खरीदकर १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया, कपास, फसल का तुरंत प्रकृति से सम्बन्ध जुड़ गया, पत्तों का आकार बढ़ने लगा, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बनने लगा, ग्रोथ में तेजी आ गई, फूलों की तथा कैरी की संख्या बढ़ने लगी, आज फसल की स्तिथि यह है की, जितने पत्ते उतनी कैरी दिख रही हैं. ३) रिझल्ट से प्रभावित किसान भाई ने तुरंत १० एकड़ में मल्टीप्लायर ट्रीटमेंट की, नकुल सर का कहना है की, किसान भाई स्वयं के पिछले रेकार्ड ब्रेक करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है कैरी की संख्या गिनते-गिनते थक जायेंगे.

कपास का उत्पादन एकरी १९ क्विंटल से ज्यादा मिलने की सम्भावना !

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  मल्टीप्लायर का कमाल. कपास का उत्पादन एकरी १९ क्विंटल से ज्यादा मिलने की सम्भावना. १) सुभाष निकोडे साहब ग्राम जामनी तहसील राजुरा जिला चंद्रपुर इन्होंने सुरुवात में रासायनिक खाद डाला था, परंतु जैसे ही मल्टीप्लायर की जानकारी मिली, ५ एकड़ कपास में प्रत्येक १० दिन के अंतर से २०० ग्राम प्रति एकड़ मल्टीप्लायर ड्रिप इरिगेशन से ६ बार दिया. २) उसी प्रकार १० दिन के अंतर से ६ बार मल्टीप्लायर का छिड़काव किया, छिड़काव के लिए २०० लीटर पानी में १८० ग्राम मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. ३) आप फोटो में देख सकते हैं, कपास की ऊंचाई निकोडे साहब के सर से ऊँची है, सबसे ऊपर का पत्ता भी जम्बो आकार का है, पत्तों का कलर गहरा हरा है, कपास निकलना सुरु हो गया है, प्रति एकड़ १० क्विंटल कपास निकल चुका है, प्रति एकड़ ९ क्विंटल तक या उससे ज्यादा और मिलने की सम्भावना है, किसान भाई का कहना है की इस बार में उत्पादन में स्वयम का आजतक का रेकार्ड तोडूंगा.

कपास की १०० प्रतिसत आर्गनिक खेती मल्टीप्लायर के साथ प्रत्येक पौधे पर २०० तक बोंड!

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१) छगनभाई पटेल (मेदपारा) ने भावनगर गुजरात से १०० प्रतिसत आर्गनिक कपास की फसल के फोटो भेजे है | २) कंपनीने पिछले साल यह बताया था की आप रासायनिक भी इस्तेमाल करें परन्तु छगनभाई जैसे हमारे बहोत से लोगों ने मल्टीप्लायर पर अपार विश्वास दिखाते हुए १०० प्रतिसत आर्गनिक खेती करके लाखों किसान भाइयों को आर्गनिक खेती का मार्ग दिखाया | ३) छगनभाई की फसल के फोटो देखिये कपास के प्रत्येक पौधे पर २०० तक बोंड गुजराती में झेंडुआ है | ४) छगन भाई कई सालों से खेती करते है भावनगर की मुख्य फसल कपास है, परन्तु ऐसी कपास की फसल उन्होंने कभी नहीं देखी | ५) छगनभाई ने बताया की इस साल भावनगर बारिस में डूब गया था, पुरे क्षेत्र में दुबारा फसल लगाई गई थी, परन्तु छगनभाई की कपास का कोई नुकसान नहीं हुआ | ६) किटक और रोगों के नियंत्रण पर बहोत बड़ी रकम खर्च करना पड़ता था इस साल एक भी छिड़काव नहीं करना पड़ा | ७) छगनभाई का ग्राम तो रांघोला है परन्तु पुरे सौराष्ट्र में छगनभाई को पहचाना जाता है, राजनीती के बड़े-बड़े मंत्री छगनभाई के दोस्त है परन्तु छगनभाई समाज सेवा में लगे रहते है, उन्होंने निष्चय किया है की आनेवाले कुछ सालों में पु...

हमेशा के मुकाबले 50 प्रतिसत बढ़कर मिला है|

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  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ. १) किसान भाई का नाम श्री भानुदास सोनवणे ग्राम बामणोद तहसील यावल जिला जळगाव महाराष्ट्र. २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक श्री भानुदास सोनवणे सर स्वयं कंपनी प्रतिनिधि हैं. ३) कपास की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ४) इस साल अधिक बरसात में कपास की फसल ख़राब हो जाने से उत्पादन घटा है. ५) भानुदास सर ने बताया की, उनके खेत में मल्टीप्लायर तकनीक के इस्तेमाल के कारण, अधिक बरसात का कोई विपरीत परिणाम नहीं हुआ, उत्पादन हमेशा के मुकाबले 50 प्रतिसत बढ़कर मिला है.

सभी विपरीत परिस्तिथियों पर मात करके दो एकर में १७ क्क्विंटल तक उत्पादन !

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  कपास में रेकार्ड ब्रेक उत्पादन १) नदीम सर की खेती अंकलेश्वर जिल्ला भरुच गुजरात में है, इस साल बरसात कम होने के कारण कपास का उत्पादा एकरी २ से ३ क्विंटल तक आया है, हम पुराने तथा आज के फोटो भेज रहे है, अभी तक दो एकर में १७ क्क्विंटल तक उत्पादन निकल चूका है, अभी भी उत्पादन ४ क्विंटल तक मिलने की सम्भावना है, यह दो कमाल है मल्टीप्लायर का, सभी विपरीत परिस्तिथियों पर मात करने की क्षमता मल्टीप्लायर में है ।