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Showing posts from March, 2022

किडनाशक भी बन जाता है मल्टीप्लायर !

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  किडनाशक भी बन जाता है मल्टीप्लायर. १) किसान भाई का नाम रमणीक भाई गांव मीखाटिंबी उपलेटा राजकोट गुजरात, इनको कंपनी के प्रतिनिधि किरणकुमार खत्री सर ने मल्टीप्लायर तकनीक की जानकारी दी. २) किसान भाई ने करेले की फसल लगा रखी थी, सफ़ेद मक्खी का प्रकोप इतना ज्यादा बढ़ गया की, अनेक दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद रिझल्ट नहीं मिल रहा था. ३) किसान भाई ने फसल निकालकर खेत की साफ़ सफाई करने का निश्चय किया, जाम कंडोरना के किसान भाई विट्ठल भाई मल्टीप्लायर के कमाल से परिचित थे, उन्होंने किसान भाई को फसल के साथ छेड़छाड़ ना करने की तथा मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने की सलाह दी. ४) रमणीक भाई ने कंपनी प्रतिनिधि से फार्मर च्वाईस पैकेज मंगवाकर करेले की फसल पर इस्तेमाल किया, कुछ ही दिनों में फसल में सुधार आया, जिस सफ़ेद मक्खी ने उत्पादन शून्य कर दिया था, अब उसका अतापता नहीं है, उत्पादन फिर से मिलना सुरु हो गया है

ग्रोथ अच्छी मिली, किड रोग के खर्च में बचत हुई |

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  कारले, करेला, Bitter guard ग्रोथ अच्छी मिली. किड रोग के खर्च में बचत हुई. १) किसान भाई का नाम शरद पाटील गांव पढ़ावद तहसील शिन्दखेड़ा जिला धुलिया महाराष्ट्र, इनको कंपनी के प्रतिनिधि प्रभुसिंग परदेशी सर ने फार्मर च्वाईस और नारायणअस्त्र की मदत से बढ़ा हुआ उत्पादन लेने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने करेले की फसल में प्रत्येक 15 दिन के अंतर से 250 ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ तीन बार दिया. ३) प्रत्येक 10 दिन के अंतर से 15 लीटर पानी में 15 ग्राम मल्टीप्लायर + 05 मिली ऑल क्लियर + 01 मिली स्प्रे प्लस का छिड़काव किया, जब भी फसल पर किड नजर आई, छिड़काव में 10 मिली नारायणअस्त्र मिलाकर छिड़काव किया. ४) रासायनिक खाद हमेशा के मुकाबले कम इस्तेमाल किया है. ५) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई है, फूल आना सुरु हो गए हैं, करेले भी लगने लगे हैं

किड रोग समस्या नहीं आने के कारण रासायनिक दवाओं पर खर्च होनेवाले पैसों की बचत हुई |

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  करेले की खेती, "मल्टीप्लायर तकनीक" के साथ। १) किसान भाई का नाम श्री नरवत सिंह ग्राम नाथा ना मुवाड़ा तहसील बायड जिला अरवल्ली गुजरात। २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता- श्री डाहयाभाई छगनभाई पटेल सर। ३) करेले की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया। ४) फसल लगाने के पहले दिन से "मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ५) छिड़काव में मल्टीप्लायर, कृष्णा ऑल क्लियर, कृष्णा नारायणअस्त्र तथा कृष्णा स्प्रे प्लस का इस्तेमाल किया है। ६) ग्रोथ अच्छी है, कलर डार्क ग्रीन लगातार बना हुआ है, फूल ज्यादा संख्या में आ रहे हैं, फल भी ज्यादा लग रहे हैं। ७) किड रोग समस्या नहीं आने के कारण रासायनिक दवाओं पर खर्च होनेवाले पैसों की बचत हुई।

करेले की खेती में कोई भी समस्या नहीं आने से छिड़काव पर होनेवाले खर्च में बचत हुई|

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करेले की खेती, मल्टीप्लायर तकनीक के साथ। १) किसान भाई का नाम- श्री माणिक आहेर ग्राम शिंदवड तहसील दिंडोरी जिला नाशिक महाराष्ट्र। २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता - श्रीमती अनीता गोविन्द सोनवणे मेडम। ३) करेले की खेती में रासायनिक खाद के साथ "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल किया। ४) रासायनिक खाद की मात्रा 20 प्रतिसत कम करके उस पर मल्टीप्लायर की कोटिंग की गई। ५) फसल की ग्रोथ शानदार हुई, फसल ताकतवर बनने के कारण, हमेशा के मुकाबले ज्यादा ताकतवर फूल आए, सभी फूल फल में कन्वर्ट होने से उत्पादन बढ़कर मिल रहा है। ६) बेलवर्गीय खेती में फंगस समस्या आती है, किसान भाई ने कृष्णा ऑल क्लियर, कृष्णा नारायणअस्त्र तथा कृष्णा स्प्रे प्लस का लगातार छिड़काव करने के कारण, कोई भी समस्या नहीं आने से छिड़काव पर होनेवाले खर्च में बचत हुई।

बैंगन की फसल में फूलों की संख्या बढ़ गई,उत्पादन ज्यादा मिलने लगा,किटक समस्या शून्य है |

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  बैंगन का उत्पादन बढ़कर मिलने लगा. १) किसान भाई का नाम..श्री मनोहर सैनी फरीदाबाद तहसील तथा जिला फरीदाबाद हरियाणा. २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक..श्री आनंद सिंह सर. ३) फसल का नाम - बैंगन ( वांगे, रिंगन ) ४) मल्टीप्लायर कितना और कब दिया..किसान भाई ने एक किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया.बाद 15 लीटर पानी में 15 ग्राम मल्टीप्लायर + 10 मिली नारायणअस्त्र + 05 मिली ऑल क्लियर + 02 मिली स्प्रे प्लस मिलाकर छिड़काव किया. ५) रिजल्ट... फसल में फूलों की संख्या बढ़ गई.उत्पादन ज्यादा मिलने लगा.किटक समस्या शून्य है .

बैंगन के पौधों का रंग रूप और ग्रोथ देखने लायक है |

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  पौधों का रंग रूप और ग्रोथ देखने लायक है . १) किसान भाई का नाम आकाश शिवहरे ग्राम कायदी तहसील वारासिवनी जिला बालाघाट मध्यप्रदेश, इनको कंपनी के प्रतिनिधि सुमेरचंद खैरवार सर ने मल्टीप्लायर की जानकारी दी. २) किसान भाई ने आधा एकड़ क्षेत्र में बैंगन की खेती की है, प्रत्येक आठ दिन के अंतर से १०० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से दिया जा रहा है. ३) प्रत्येक ७ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया जा रहा है. ४) मल्टीप्लायर के नियमित इस्तेमाल से फसल फसल पहले दिन से तेजी से बढ़ रही है, अभी तक किड रोग के कोई लक्षण नहीं हैं, पत्ते लगातार डार्क ग्रीन रंग के बने हुए हैं. ५) किसान भाई फसल को देखकर इतना खुश है की, आगे से पुरे १० एकड़ खेत में मल्टीप्लायर से ही खेती करने का निश्चय किया है.

शून्य उत्पादन देनेवाली बैंगन की फसल जोरदार उत्पादन देने लगी, पहला उत्पादन २५ कैरेट मिला दूसरा हार्वेस्टिंग ९० कैरेट का मिला |

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  वांगी, बैंगन, Brinjal शून्य उत्पादन देनेवाली फसल जोरदार उत्पादन देने लगी . १) किसान भाई का नाम शैलेश पान पाटील सटाणा जिला नाशिक किसान भाई ने बैंगन की फसल लगाईं थी, कंपनी के प्रतिनिधि सुनील शिरोडे सर ने बताया की बैगन की फसल में जहरीली दवाओं के भयानक छिड़काव से बचने के लिए मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करो, किड रोग कम आएंगे उत्पादन भी बढ़कर मिलेगा. २) १५ दिन के अंतर से २०० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन के माध्यम से दिया तथा १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ३) फसल तेजी से बढ़ने लगी, उत्पादन भी सुरु हो गया है, पहला उत्पादन २५ कैरेट मिला दूसरा हार्वेस्टिंग ९० कैरेट का मिला , किड रोग के लिए महँगी दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा इसलिए किसान भाई का फायदा बढ़ रहा है

हमेशा के मुकाबले उत्पादन डबल मिल रहा है |

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  वांगी, बैंगन, Brinjal उत्पादन डबल मिल रहा है. १) किसान भाई का नाम विलास हरिश्चंद्र अवचट ग्राम यवत तहसील दोंड जिला पुणे, कंपनी के प्रतिनिधि जालिंदर बाबूराव गायके सर ने किसान भाई को मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने से, किड रोगों में कमी आती है,उत्पादन बढ़कर मिलता है, इत्यादि जानकारी दी. २) किसान भाई ने आधा एकड़ क्षेत्र में गौरव (पंचगंगा) वेरायटी की बैंगन की फसल लगाईं थी, खेती में पानी देने की व्यवस्था के लिए ड्रिप लगाईं है, ड्रिप के माध्यम से ३ बार २५० ग्राम मल्टीप्लायर दिया. ३) ४ बार फसल पर मल्टीप्लायर का छिड़काव किया, फसल इतनी जबरदस्त तैयार हुई है, जिसे देखने के लिए परिसर के किसान भाई आ रहे हैं. ४) विलास सर का कहना है की, हमेशा के मुकाबले उत्पादन डबल मिल रहा है .

खर्चों में कमी के साथ उत्पादन ४० से ५० प्रतिसत ज्यादा मिल रहा है

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  बैंगन,वांगे,रिंगन. उत्पादन में ५० प्रतिसत की बढ़त. १) किसान भाई का नाम सुनील भाई देवांगन बिलासपुर छत्तीसगढ़, किसान भाई मुख्य रूप से सब्जी भाजी की खेती करते हैं, कंपनी के प्रतिनिधि हिमांशु मिश्रा सर के मार्गदर्शन में अच्छा उत्पादन ले रहे हैं. २) सुनील भाई सब्जी लगाते हैं, इसलिए उनके मन में ऐसा विचार आया की, क्यों ना लोगों को रसायन मुक्त, जहर मुक्त सब्जियां दी जाएँ, उन्होंने हिमांशु सर से बात की, सर ने बताया की आप मल्टीप्लायर की तकनीक से धीरे-धीरे करके आर्गनिक बन सकते हैं. ३) मल्टीप्लायर तकनीक में आपका उत्पादन बढ़कर मिलेगा, खर्च कम-कम होता जाएगा, रासायनिक खाद कम-कम होकर ५ से ७ सालों में शून्य हो जायेंगे, जहरीली दवाओं का छिड़काव भी कम-कम होकर बंद हो जायेगा. ४) सुनील भाई ने बैंगन की फसल को रासायनिक खाद देते समय १ किलो मल्टीप्लायर खाद में मिलाकर लगाया. ५) पौधे खेत में लगाने के बाद प्रत्येक ६ दिन के अंतर से २५० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप से दिया जा रहा है, फसल पर नियमित छिड़काव भी किया जा रहा है, किसी भी रासायनिक दवा के घोल में मल्टीप्लायर प्रति १५ लीटर २० ग्राम दिया जा रहा है. ६) पहले दिन से ...

तापमान ४२ डिग्री तक होने के बावजूद पौधे हरे-भरे तथा ताजे दिख रहे हैं !

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  बैंगन मल्टीप्लायर तकनीक के साथ. १) किसान भाई का नाम श्री महेंद्र चौकसे ग्राम सुकरी तहसील घुमा जिला जबलपुर मध्यप्रदेश. २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता- विक्रमवीर पुरस्कार विजेता श्री हिमांशु मिश्रा सर. ३) किसान भाई ने 10 एकड़ क्षेत्र में बैंगन ( मराठी में वांगे,गुजराती में रिंगन) की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ४) बैंगन की फसल अभी 75 दिन की हुई है, पौधे लगाने के दिन से प्रति सप्ताह 250 ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ दिया जा रहा है. ५) प्रत्येक 08 दिन के अंतर से मल्टीप्लायर, ऑल क्लियर और स्प्रे प्लस का छिड़काव किया जा रहा है. ६) तापमान ४२ डिग्री तक होने के बावजूद पौधे हरे-भरे तथा ताजे दिख रहे हैं. ७) उत्पादन हमेशा के मुकाबले ज्यादा मिल रहा है.

काजू की बाग में किसान भाई कहना है की समय से पहले उत्पादन देनेवाला उत्पाद है मल्टीप्लायर |

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  काजू, काजू, Chashew काजू की बाग में किसान भाई कहना है की समय से पहले उत्पादन देनेवाला उत्पाद है मल्टीप्लायर | १) महाराष्ट्र के कोंकण विभाग के राजापुर से श्री विजय लघावकर के काजू बगीचे के फोटो भेजे है | २) काजू की बाग़ में फूल आने का समय नजदीक आ रहा है, अभी तक कोंकण में किसी भी बाग़ में फूल नहीं आये है परन्तु श्री विजय सर के काजू के बगीचे में फूल आना सुरु हो गया है | ३) सुनने में बात साधारण लगती है, परन्तु खेती में ऐसा होना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योकि खेती उत्पादन जब बाजार में आता है तब उसका भाव बहोत ज्यादा रहता है, जब सभी किसान भाइयों का उत्पादन बाजार में आने लगता है भाव घट जाता है | ४) काजू में इसका ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा परन्तु तुरंत खाए जानेवाले उत्पादन में इसका इतना फायदा मिलता है की किसान भाई मालामाल हो जाता है | ५) पिछले ५० दिनों से बाजार में बटला फली (वटाणा - मटर ) आ रही है थोड़ा माल बाजार में आ रहा था इसलिए १०० से १४० रुपये किलो के भाव से बिक्री हो रहा था अभी दो दिनों से ज्यादा माल आना सुरु हुआ और भाव ४० रूपये तक नीचे ...

काजू की बाग पिछले साल के सभी रेकार्ड ध्वस्त करने की दिशा में.

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  काजू की बाग पिछले साल के सभी रेकार्ड ध्वस्त करने की दिशा में. १) दिलीप शिंदे सर महाड़ जिला रायगढ़, पिछले १ साल से लगातार अनेक प्रकार की फसलों पर मल्टीप्लायर का इस्तेमाल कर रहे हैं, इस साल कोकण क्षेत्र में सभी बगीचों में काजू कम मात्रा में लगे हैं, ऐसी विपरीत परिस्तिथि में भी शिंदे साहब उत्पादन का रेकार्ड ब्रेक करनेवाले है. २) काजू और आम (हापुस) की खेती के तज्ञ हैं, हजारों किसान भाई उनके मार्गदर्शन में कम खर्च में बढ़ा हुआ उत्पादन ले रहे हैं. ३) जून महीने में बरसात प्रारम्भ होने के पहले, बगीचे के सभी पौधों को मल्टीप्लायर का ड्रेंचिंग किया, उसके बाद फ्लावरिंग आने पर एक बार और छोटे आकार के काजू बन जाने पर दूसरी बार, १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ४) काजू की बाग पिछले साल के सभी रेकार्ड ध्वस्त करने की दिशा में.

काजू की बाग पहले साल 3 गुना उत्पादन बढ़ा, इस साल उससे भी ज्यादा !

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  काजू की बाग में मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से, काजू की बाग पहले साल 3 गुना उत्पादन बढ़ा, इस साल उससे भी ज्यादा ! . 1) किसान भाई का नाम दिलीप शिंदे महाड जिला रायगढ़ महाराष्ट्र, 2) शिंदे साहब का मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने का यह तीसरा साल है, उन्होंने पहले साल से कंपनी के टेलीग्राम चेनल पर दिए गए काजू के शेड्यूल का तंतोतंत पालन करते हुए बाग में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. 3) मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होने के पहले तक डेढ़ टन उत्पादन मिलता था, मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने के बाद शिंदे साहब को साढ़े चार टन (4.5) उत्पादन मिला. 4) इस साल उत्पादन बढ़कर सात टन ( 7 ) होने की संभावना शिंदे साहब ने व्यक्त की है. 5) मल्टीप्लायर के पहले और मल्टीप्लायर इस्तेमाल के बाद उत्पादन 4 गुना से ज्यादा बढ़ने के बावजूद उत्पादन बढ़ने का क्रम 7 सालों तक जारी रहेगा. 6) काजू बाजार में आने में समय है, दिलीप शिंदे साहब के बगीचे से काजू निकलना प्रारम्भ हो गया है, अभी उनको 160 रुपये प्रति किलो भाव मिल रहा है.

4 साल में उत्पादन छे गुना से ज्यादा बढ़ गया ! काजू का उत्पादन 10 टन से ज्यादा मिलेगा|

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  काजू की बाग़ में मल्टीप्लायर तकनीक. 4 साल में उत्पादन छे गुना से ज्यादा बढ़ गया ! काजू का उत्पादन 10 टन से ज्यादा मिलेगा| १) किसान भाई का नाम श्री दिलीप शिंदे महाड जिला रायगढ़ महाराष्ट्र. ३) किसान भाई के पास 2000 काजू के पेड़ हैं, पिछले चार वर्षों से काजू की बाग़ में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. ४) मल्टीप्लायर का इस्तेमाल प्रारम्भ किया उस वर्ष काजू का उत्पादन 1.5 टन (डेढ टन) मिला, दूसरे साल उत्पादन बढ़कर 4.75 टन (पौने पांच टन) हो गया, तीसरे साल उत्पादन बढ़कर 8.5 टन (साढ़े आठ टन) हो गया, इस वर्ष किसान भाई का कहना है की, काजू का उत्पादन 10 टन से ज्यादा मिलेगा. ५) काजू के बगीचे में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल प्रारम्भ करने के पहले साल से उत्पादन बढ़कर मिल रहा है, चौथे वर्ष में उत्पादन छे गुना हो गया है, तक़रीबन सात वर्ष तक उत्पादन बढ़ता रहेगा, उसके बाद उत्पादन स्थिर होगा. ६) सात वर्ष के बाद किसान भाई को मल्टीप्लायर भी डालने की आवश्यकता नहीं रहेगी. ७) मतलब मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल होनेवाली खेती सात साल में झिरो बजेट नैसर्गिक फार्मिंग बन जाती है, मतलब सात साल के बाद खेती से...

मल्टीप्लायर तकनीक से उपचारित हापुस आम को बाजार में,सोने के जैसी कीमत मिल रही है |

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मल्टीप्लायर तकनीक से उपचारित हापुस आम को बाजार में, सोने के जैसी कीमत मिल रही है | १) कोई भी उत्पादन हो, जितना जल्दी बाजार में जायेगा उतनी ज्यादा कीमत मिलेगी, और आम तो सभी फलों का राजा है, इसका साल भर से इन्तजार होता है, मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से आप सबसे पहले अपना उत्पादन बाजार में भेज कर ज्यादा पैसा काम सकते हैं. २) शकील अल्ताफ मुल्ला इनकी आम की बाग़ ग्राम वाघोटन तहसील देवगड़ जिला रत्नागिरी महाराष्ट्र में है, इन्होंने आम के पेड़ों को मल्टीप्लायर का ड्रेंचिंग किया, पेड़ में सभी जगह नई पत्तियां आ गई, नई पत्तियां जूनि पत्तियों के मुकाबले ज्यादा भोजन बनाती हैं, इसलिए पुरे पेड़ पर एकसाथ मोहोर आ गया. ३) मोहोर की सेटिंग हो जाने के बाद मल्टीप्लायर का छिड़काव किया, फल तेजी से बढ़ने लगे, अभी बड़ी संख्या में किसान भाइयों के बगीचे मोहोर सेटिंग की अवस्था में हैं, कुछ के मोहोर काले पड़ रहे हैं, और शकील साहब आम निकालकर बम्बई के बाजार में भेज रहे हैं. ४) जब से शकील साहब का आम बाजार में जाना सुरु हुआ है, आजु-बाजू के किसान भाई उनके पेड़ों को देखने आ रहे हैं, और मल्टीप्लायर की पूरी तकनीक को विस्तार से जानकर जा र...

मल्टीप्लायर तकनीक से एक मोहोर पर १०-१० आम.

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मल्टीप्लायर तकनीक से  एक मोहोर पर १०-१० आम. १) दिनांक १६-०२-२०१७ को कंपनी के टेलीग्राम चैनल तथा फेसबुक पर, शकील अल्ताफ मुल्ला ग्राम वाघोटन तहसील देवगढ़ जिला रत्नागिरी, इनके आम के बगीचे की जानकारी पोस्ट की थी. २) फरवरी महीने में जहाँ दूसरे बगीचों में मोहोर की सेटिंग चल रही थी, तब शकील मुल्ला साहब मुंबई के बाजार में सोने की कीमत पर आम बेच रहे थे. ३) जानकारी पोस्ट होने के बाद कुछ फोटो मेरे पास आये थे, समय से पोस्ट नहीं कर पाया, आज फिर से मुझे दिखे, इसलिए मेने सोचा आप तक पहुँचाना चाहिए, इन फोटो में ८ से १० आम एक मोहोर पर लगे हैं, ऐसा सभी मोहोर पर नहीं है, परन्तु बहोत सारे मोहोर पर ज्यादा संख्या में आम लगे हैं. ४) वैसे तो ३-४ आम लगते हैं, परन्तु यहाँ लगे आमों की संख्या बहोत ज्यादा है.

मल्टीप्लायर तकनीक से आम का साइज जम्बो और फलों की संख्या में भयानक बढ़त.!

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मल्टीप्लायर तकनीक से आम का साइज जम्बो और फलों की संख्या में भयानक बढ़त.! १) किसान भाई मधुकर ग्राम मोरोची तहसील संगोला जिला सोलापुर, इनके पास आम का बगीचा है, काफी मेहनत और प्रयत्नों के बावजूद पेड़ों पर आमों की संख्या तथा साइज में बढ़त नहीं हो रही थी. २) पहले किये गए सभी प्रयत्न निष्फल होने के बावजूद किसान भाई ने आम के पेड़ों को मल्टीप्लायर का ट्रीटमेंट किया, और जबरदस्त परिणाम देखकर किसान भाई भी आश्चर्य चकित रह गए. ३) मल्टीप्लायर ट्रीटमेंट का परिणाम यह हुआ की, ज्यादा से ज्यादा संख्या में नए पत्ते आने से बाग़ में सूर्यप्रकाश की मदत से अधिक भोजन बनने लगा, पहले भोजन की कमी के कारण आम छोटे आकार के होकर गिर जाते थे, वह समस्या समाप्त हो गई. ४) पेड़ों को आवश्यकता से अधिक भोजन मिल रहा था, इसलिए मोहोर भी स्ट्रांग मिला, पहले एक मोहोर पर मुश्किल से एक आम दिखता था, इस बार प्रत्येक मोहोर पर आमों की संख्या ज्यादा है. ५) किसान भाई का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ की, आम तेजी से आकार लेने लगे, प्रत्येक आम जम्बो आकार में परिवर्तित होने लगा, जम्बो आकार के फलों को बाजार में ज्यादा भाव मिलता है. ६) किसान भाई के पेड़ों को...

आम की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक और बिना मल्टीप्लायर का फरक देखिये.

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आम की फसल में  मल्टीप्लायर तकनीक और बिना मल्टीप्लायर का फरक देखिये. १) आप फोटो में देख सकते है, १ पेड़ में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल हुआ है, उसके आम बाजार में बिक्री के लिए जाने की तैयारी में हैं और जिन पेड़ों पर मल्टीप्लायर का इस्तेमाल नहीं हुआ है, उस पेड़ पर अभी मोहोर की सेटिंग चल रही है. २) हिम्मतभाई कोराट, ग्राम समठियाला, तहसील ऊना, जिला गीर सोमनाथ, इन्होंने आम के १ पेड़ को मल्टीप्लायर का ट्रीटमेंट किया, एकदिन किसान भाई ने देखा की जिस पेड़ को मल्टीप्लायर का ट्रीटमेंट किया था, उसमें मोहोर आ रहा है, परंतु किसान भाई आश्चर्यचकित तब हुआ जब उसने उस मोहोर को सेट होते देखा, आप जो फोटो देख रहे हैं ये दो-तीन दिन पहले के फोटो हैं, कुछ ही दिनों में यह आम बिक्री के लिए बाजार में चला जाएगा, गुजरात का केशर आम मई के पहले बाजार में नहीं आता, यह आम मार्च महीने में बाजार में जायेगा, मतलब पैसा ही पैसा.

मल्टीप्लायर तकनीक से आमों का साइज बड़ा होने के कारण और बाजार भाव ज्यादा मिल रहा है !

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 मल्टीप्लायर तकनीक से आमों का साइज बड़ा होने के कारण और बाजार भाव ज्यादा मिल रहा है ! 1) किसान भाई का नाम विजय लघावकर ग्राम भू तहसील राजापुर जिला रत्नागिरी महाराष्ट्र, 2) किसान भाई पिछले 2 सालों से आम की बाग तथा काजू और नारियल की बाग में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल कर रहे हैं. 3) इस साल आम का उत्पादन कम है, बहोत कम आम लगे हैं, परन्तु विजय सर की बाग में यह समस्या नहीं है, आम की संख्या भी ज्यादा है, तथा आम का आकार जम्बो मिल रहा है. 4) किसान भाई ने बरसात प्रारम्भ होने के पहले प्रत्येक पेड़ के रूट झोन में 200 ग्राम मल्टीप्लायर दिया, फ्लावरिंग आने से लेकर अभी तक 4 बार मल्टीप्लायर का छिड़काव किया है. 5) इस साल आम कम होने के कारण भाव ज्यादा मिल रहा है, विजय सर के आमों का साइज बड़ा होने के कारण और ज्यादा भाव मिल रहा है.

मल्टीप्लायर तकनीक से पेड़ पर जहाँ देखो आम ही आम..!!

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  मल्टीप्लायर तकनीक से पेड़ पर जहाँ देखो आम ही आम ..!! १) किसान भाई का नाम श्री किशोर बी. पटेल बारडोली जिला सूरत गुजरात. २) किसान भाई ने आम के बगीचे में प्रति एकड़ 250 ग्राम मल्टीप्लायर प्रत्येक 07 दिन के अंतर से पिछले 03 महीने से दे रहे हैं. ३) प्रत्येक 07 दिन के अंतर से होनेवाले छिड़काव में मल्टीप्लायर मिलाया जा रहा है. ४) पेड़ों की उम्र सिर्फ 05 वर्ष है, पूरा पेड़ आम से लद गया है, जितनी भी सेटिंग हुई, सभी आम जम्बो आकार ले रहे हैं. ५ ) गुजरात में केसर आम मई महीने में बाजार में आता है, आप जो फोटो देख रहे हैं, ये 10 अप्रेल के फोटो हैं, मतलब जब हार्वेस्टिंग होगी, एक-एक आम जम्बो आकार का मिलेगा. ६) जम्बो आकार के फलों को भाव भी ज्यादा मिलता है, और जम्बो आकार के कारण उत्पादन भी ज्यादा मिलता है

मल्टीप्लायर तकनीक से खर्च कम उत्पादन डबल और अनार का साइज भी जम्बो मिला |

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डालिम्ब, अनार, Pomegranate मल्टीप्लायर तकनीक से खर्च कम उत्पादन डबल और अनार का साइज भी जम्बो मिला | १) किसान भाई का नाम श्री अरविन्द विट्ठल पवार गांव हिवरे बाजार तहसील और जिला अहमदनगर महाराष्ट्र, इनकी 2 एकड़ की अनार की बाग है, अनार की बाग में तेल्या रोग की समस्या उस बाग में ज्यादा आती है, जिस बाग में रासायनिक खादों का इस्तेमाल होता है, इसलिए इन्होने बाग का सम्पूर्ण पोषण मल्टीप्लायर से करने का निर्णय लिया. २) बहार के लिए पानी देने के बाद प्रत्येक 10 दिन के अंतर से 500 ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से दिया. ३) प्रत्येक 10 दिन के अंतर से मल्टीप्लायर का छिड़काव किया गया, इसलिए पौधे ताकतवर बन गए. ४) रासायनिक खाद का इस्तेमाल ना होने से तथा मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल होने से किड तथा रोग कम से कम हो गए, रासायनिक दवाओं का छिड़काव कम से कम करना पड़ा, इसलिए पैसों की बचत हुई, ५) मल्टीप्लायर के नियमित इस्तेमाल से पौधों की पत्तियां गहरे हरे रंग की बन गई, इसलिए सूर्यप्रकाश की मदत से ज्यादा भोजन बनने लगा, ताकतवर फूल आये मोदी फूलों की संख्या ज्यादा रही. 6) फूल ज्यादा संख्या में सेट हुए, अनार ...

मल्टीप्लायर तकनीक से कम पानी में भी अनार की फसल से ज्यादा उत्पादन मिला..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से कम पानी में भी अनार की फसल से ज्यादा उत्पादन मिला..!! अनार, Pomegranate १) किसान भाई का नाम श्री रामराव काले ग्राम शिवना अजिंठा लेणी तहसील सिल्लोड जिला औरंगाबाद महाराष्ट्र. २) फसल का नाम - अनार. ३) मल्टीप्लायर कितना और कब दिया, प्रति एकड़ 250 ग्राम मल्टीप्लायर प्रति सप्ताह 200 लीटर पानी में मिलाकर ड्रिप से दिया.सप्ताह में दो बार मल्टीप्लायर का छिड़काव किया. ४) रिजल्ट...किसान भाई के पास सिर्फ आधा घंटा मिल सके इतना ही पानी था.कम से कम पानी के बावजूद पौधों की उत्पादन क्षमता में कोई कमी नहीं आई.फूलों की संख्या अच्छी मिली, सेटिंग अच्छी मिली, अपेक्षा से ज्यादा अनार लगे हैं.परिसर में तेल्या रोग से किसान भाइयों की फसलें ख़राब हो गई, इस खेत में तेल्या रोग का नामोनिशान नहीं है.परिसर के किसान भाई बड़ी संख्या में इस मल्टीप्लायर तकनीक की बाग़ को देखने के लिए आ रहे हैं. ५) उत्पादन बढ़ेगा क्या ? फलों का आकार बड़ा है, अभी उत्पादन निकलने में दो महीने का समय है. आज की साइज देखकर सभी का कहना है की, अनार का साइज जम्बो मिलेगा. ६) दूसरी फसलों पर भी इस्तेमाल किया है. किसान भाई ने अनार...

18 महीने के अनार के पौधों पर मल्टीप्लायर तकनीक से 200 तक फल,सभी फलों का साइज बेमिसाल.

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  18 महीने के अनार के पौधों पर मल्टीप्लायर तकनीक से 200 तक फल, सभी फलों का साइज बेमिसाल. 1) यह कमाल 1 या 2 पेड़ों पर नहीं हुआ है, परन्तु जो कुछ हुआ है, वह अविश्वसनीय है, इसलिए बगीचे की एक फोटो ऊपर से शूट की है, जिसे आप झूम करके एक-एक पौधे में कितने फल लगे है, आसानी से देख सकते है, झूम करके देखने पर आप देखेंगे की, पूरी बाग में सभी पेड़ों पर प्रचण्ड संख्या में फल लगे है. 2) दोस्तों, अनार की खेती के जानकार जानते है की, 18 महीने के पौधे पर ज्यादा से ज्यादा 50 तक फल मिलते है, उसमें भी सभी फलों का पोषण एक जैसा नहीं होता, इसलिए कुछ फल बड़े तथा कुछ छोटे रह जाते है. 3) दोस्तों, प्रकृति सर्व शक्तिमान है, उसकी ताकत से बड़ी कोई ताकत नहीं है, आप सभी जानते है की, वनस्पति को भोजन देने वाली व्यवस्था प्रकृति द्वारा संचालित होती है, रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण वह व्यवस्था बंद जैसी हो गई है, इसलिए आज सभी किसान भाई फसलों की भोजन व्यवस्था और किड तथा रोगों का कंट्रोल करते - करते कंगाल बन गए है. 4) कृष्णा एग्री सायन्स प्रायवेट लिमिटेड के उत्पादन आपकी मिटटी को प्राकृतिक बनाते है, इसलिए प्रकृ...

अनार की फसल मैं मल्टीप्लायर तकनीक से भाव ११० रुपये प्रति किलो मिला और इतना ही नहीं उत्पादन ३० प्रतिसत ज्यादा मिला |

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अनार की फसल मैं मल्टीप्लायर तकनीक से भाव ११० रुपये प्रति किलो मिला और इतना ही नहीं उत्पादन ३० प्रतिसत ज्यादा मिला l   १) किसान भाई का नाम महालअप्पा कोलेकर ग्राम आरेवाड़ी तहसील कवठे महांकाल जिला सांगली, २) प्रत्येक 15 दिन के अंतर से 500 ग्राम मल्टीप्लायर प्रति एकड़ ड्रिप इरीगेशन की मदत से दिया. ३) किसान भाई रासायनिक खाद इस्तेमाल नहीं करना चाहता था, इसलिए रासायनिक खाद सिर्फ 30 किलो इस्तेमाल किया है. ४) प्रत्येक 10 दिन के अंतर से छिड़काव किया है, छिड़काव में 15 लीटर पानी में 10 ग्राम मल्टीप्लायर + 2 मिली कृष्णा ऑल क्लियर + 1 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस और आवश्यक हुआ तो रासायनिक दवाई मिलाकर छिड़काव किया है. ५) किसान भाई ने मल्टीप्लायर का छिड़काव सिर्फ फलों का रंग बदलने के पहले तक किया है, फलों का रंग बदलने के बाद छिड़काव में मल्टीप्लायर नहीं मिलाया. ६) मल्टीप्लायर बहोत अच्छे से मिक्स करना पड़ता है, कई बार किसान भाई को कुछ काम काम खेत में करनेवालों के भरोसे छोड़ देना पड़ते हैं, अगर काम करनेवाले ने मल्टीप्लायर पानी में अच्छे से नहीं मिलाया, फल पर दाग आ सकते हैं. ७) मल्टीप्लायर ने पेड़ों को ताकत स...

मल्टीप्लायर तकनीक से अनार की खेती में खर्च कम और उत्पादन रेकार्ड ब्रेक

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मल्टीप्लायर तकनीक से अनार की खेती में खर्च कम और उत्पादन रेकार्ड ब्रेक १) जिस प्रकार अधिक मात्रा में किया गया भोजन, इंसान के लिए हानिकारक होता है, उसी प्रकार फसलों को भी अगर कोई घटक ज्यादा मात्रा में दिया जाय, तो हानिकारक होता है, आजकल महंगी खेती करनेवाले किसान भाई, खेती में NPK के साथ - साथ, पानी में घुलनशील सभी प्रकार के सूक्ष्म अन्न द्रव्य भी देते है, परिणाम यह होता है की, घटकों की अधिकता के कारण फसल की सारी सिस्टिम में खराबी आ जाती है. २) उपरोक्त अनार की बाग में पुरे समय प्रकृति की सिस्टम कार्यरत रही, क्योंकि इस प्लाट में ७० प्रतिसत उत्पादन कृष्णा एग्री सायन्स प्रा.लि. के इस्तेमाल हुए, इसलिए फसल की स्वयम की सिस्टम काम करती रही, जिस घटक की जितनी आवश्यकता थी उतना मिलता गया, किसी घटक की ना तो कमी हुई ना कोई घटक ज्यादा हुआ. ३) इसलिए तेल्या रोग जिसके नाम से अनार की खेती करनेवाला किसान भाई कांप जाता है उसका कोई नामोनिसान नजर नहीं आया, फसल कृष्णा एग्री के उत्पादनों ने इतनी ताकतवर बना दी थी की, किड और रोगों ने कोई समस्या उत्पन्न नहीं की. ४) अनार की यह बाग ६ एकड़ की है, किसान भाई का नाम ह...