Posts

Showing posts from May, 2023

शेड्यूल (चना, हरभरा ) चने की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का उपयोग कैसे करे |

 चना, हरभरा. चने की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ.    निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    1) चने के बीजों को बीजोपचार करना है.प्रति किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी मिलाकर बीजों को हाथ से हलाने से बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर बाद बुवाई कर सकते हैं. २) बुवाई करते समय डाले जानेवाले रासायनिक खाद में दो किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है. ३) चने की फसल में मल्टीप्लायर देने से फसल की ग्रोथ जबरदस्त होती है, शाखाओं की संख्या बढ़ती है, शाखा की प्रत्येक पत्ती के पास फूल लगता है, कई किसान भाइयों ने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करके डबल से ज्यादा उत्पादन लिया है. ४) मिटटी से उत्पन्न होनेवाले रोगों के कारण फसल में मर रोग समस्या आती है, कंपनी प्रतिनिधि से ट्रायकोडर्मा खेत पर तैयार करने की जानकारी लें, एक एकड़ का खर्चा 40 रुपये आता है. ५) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ६) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प...

शेड्यूल तरबूज-खरबूज-खीरा ककड़ी.

 तरबूज-खरबूज-खीरा ककड़ी. तरबूज,खरबूज,खीरा ककड़ी की खेती मल्टीप्लायर तकनीक से करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद पर दो किलो मल्टीप्लायर कोटिंग करके देना है. २) उपरोक्त फसलों में मर रोग की समस्या आ सकती है, उससे बचाव के लिए कंपनी प्रतिनिधि से जानकारी लेकर ट्रायकोडर्मा ट्रीटमेंट करना है, प्रति एकड़ 40 रुपये का खर्चा आता है. ३) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ४) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ५) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग प्रत्येक इस्तेमाल के बाद कम-कम होते जाएंगे. 

शेडयूल मोसम्बी-संतरा-निम्बू-सीताफल,शरीफा-किन्नू-अमरुद,पेरू,जाम-बोर,एप्पल बोर.

 मोसम्बी-संतरा-निम्बू-सीताफल,शरीफा-किन्नू-अमरुद,पेरू,जाम-बोर,एप्पल बोर. की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न शेड्यूल एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद में चार किलो मल्टीप्लायर कोटिंग करके देना है. २) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ३) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ४) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा.

शेडयूल तूर (अरहर) मसूर-उड़द-मूंग.

 तूर (अरहर) मसूर-उड़द-मूंग. दलहन फसलों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    १) बुवाई करने के पूर्व बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचारित करें, बीजोपचार करने के लिए एक किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी मिलाकर बीजों को हाथ से हलाने से बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर बाद बुवाई कर सकते हैं. २) रासायनिक खाद देते समय अरहर (तूर डाल) के लिए दो किलो मल्टीप्लायर रासायनिक खाद पर कोटिंग करके देना है, मसूर,उड़द और मूंग के लिए रासायनिक खाद पर एक किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है.   ३) मसूर उड़द और मूंग दाल की फसल में कभी-कभी फफूंद (फंगस) का अटेक आता है, उससे उत्पादन प्रभावित होता है,  फसल पर फफूंद आने के पहले या बाद में कृष्णा ऑल क्लियर का छिड़काव करिये. ४) मल्टीप्लायर फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता कराता है, इसलिए फसल के पत्तों का साइज बड़ा बनता है, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बनता है, फसल सूर्यउर्जा की मदत से ज्यादा भोजन बनाती है. ५) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो,...

शेडयूल केला

 केला. केले की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक हजार पौधों के लिए है. १) अगर आप केले के कंद लगा रहे हों, तब 10 लीटर पानी में 50 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर केले के कंद उसमें डुबाकर लगाएं. 2) केले के पौधे या कंद खेत में लगाने के बाद 1000 पौधों के लिए 200 लीटर पानी में एक किलो मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक पौधे के रूट झोन में 200 मिली घोल डालना है. ३) जब पौधों को रासायनिक खाद देना हो, तब रासायनिक खाद पर चार किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है. ४) रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण 20 प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा. ५) मिटटी से उत्पन्न होनेवाले रोगों के कारण फसल में मर रोग समस्या आती है, कंपनी प्रतिनिधि से ट्रायकोडर्मा खेत पर तैयार करने की जानकारी लें, एक एकड़ का खर्चा 40 रुपये आता है. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से 5 से 7 साल में रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाता है, सम्पूर्ण खेती आर्गनिक बन जाती है, जिस दिन से मल्टीप्लायर तकनीक का इस...

शेडयूल पपीता, पपई.

 पपीता, पपई. पपीता (पपई) की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) पपीते के पौधे खेत में लगाते समय 200 लीटर पानी में एक किलो मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक पौधे के पास 200 मिली घोल डालना है. २) पौधों को रासायनिक खाद देते समय खाद पर चार किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है. ३) उपरोक्त ट्रीटमेंट से पौधों को आवश्यकता से अधिक भोजन मिलेगा, इसलिए व्हायरस से फसल का बचाव होगा. ४) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ५) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग समस्या कम-...

शेडयूल आलू (बटाटा) गाजर-बीट (चुकंदर) प्याज (कांदा) लस्सन (लहसुन) रतालू-अरबी (अरवी,अरुम) सुरन,जमीकंद.

 आलू (बटाटा) गाजर-बीट (चुकंदर) प्याज (कांदा) लस्सन (लहसुन) रतालू-अरबी (अरवी,अरुम) सुरन,जमीकंद. मिटटी के अंदर लगनेवाली सब्जियों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) बीजों को मल्टीप्लायर से बीजोपचारित करके लगाना है, बीजोपचार करने के लिए एक किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर बीजों के साथ रगड़ना है, सभी बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर के बाद लगा सकते हैं. २) कंद लगाने के पहले 10 लीटर पानी में 50 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर उसमें कंद डुबाकर लगाना है. ३) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद पर २ किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है. ४) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ५) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने ...

शेडयूल जीरा-हल्दी-अदरक-अजवाइन,ओवा-धनिया-कढीपत्ता,तेजपान

जीरा-हल्दी-अदरक-अजवाइन,ओवा-धनिया-कढीपत्ता,तेजपान मसाला फसलों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न शेड्यूल एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद में दो किलो मल्टीप्लायर कोटिंग करके देना है. २) जीरा फसल में ज्यादा ठंडी से पौधे मरने लगते हैं, कृष्णा ऑल क्लियर का छिड़काव होता रहनेवाले पौधे नहीं मरते, ऐसा राजस्थान और गुजरात के किसान भाइयों का अनुभव है. ३) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ४) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ५) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग प्रत्येक इस्तेमाल के बाद कम-कम होते जाए...

शेडयूल अंगूर (द्राक्ष)

 अंगूर (द्राक्ष) अंगूर की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) अंगूर के बगीचे में बहार लेने के लिए रासायनिक खाद देते समय खाद पर चार किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है. २) जब तक अंगूर के बगीचे में फ्लावरिंग नहीं आती, होनेवाले छिड़काव में प्रति लीटर एक ग्राम मल्टीप्लायर मिलाना है, फ्लावरिंग आने के बाद मल्टीप्लायर का इस्तेमाल बंद करना है. ३) अंगूर के बगीचे में पत्तों पर एफिड, व्हाइट फ्लाई और थ्रिप्स की समस्या में बेहतर रिजल्ट के लिए कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली इस्तेमाल करें. ४) अंगूर की बाग़ में फफूंद रोग जैसे डाउनी मिल्ड्यू, पॉवडरी मिल्ड्यू की समस्या में बेहतर रिजल्ट के लिए कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली इस्तेमाल करें. ५) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ६) अंगूर के किसान भाई ग्रोथ तथा अंगूर का आकार बढ़ाने के लिए तरह-तरह के उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, मल्टीप्लायर तकनीक के इस्...

शेडयूल टमाटर-बैंगन,(वांगे,रिंगन)-मटर,(वटाणा,बटला)-भेंडी-मिर्ची,शिमला मिर्ची-पत्ता गोबी-फूल गोबी-चवली-सुरजने की फली,(सहजन,शेवगा)-गवार फली.

  टमाटर-बैंगन,(वांगे,रिंगन)-मटर,(वटाणा,बटला)-भेंडी-मिर्ची,शिमला मिर्ची-पत्ता गोबी-फूल गोबी-चवली-सुरजने की फली,(सहजन,शेवगा)-गवार फली. फल सब्जियों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) रासायनिक खाद देते समय दो किलो मल्टीप्लायर खाद पर कोटिंग करके देना है. २) फ्लावरिंग आने से पहले किये जानेवाले छिड़काव के घोल में प्रति पंप 15 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव करें. ३) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ४) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ५) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग प्रत्येक इस्ते...

शेडयूल पालक-मेथी-सुवा,शेपू-चवलाई-कोथंबीर.

 पालक-मेथी-सुवा,शेपू-चवलाई-कोथंबीर. पत्तेवाली सब्जियों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न शेड्यूल एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) बुवाई करने से पहले बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचार करना है, बीजोपचार करने के लिए, एक किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी मिलाकर बीजों को आपस में रगड़ना है, ऐसा काने से सभी बीज काले-काले हो जायेंगे, आप थोड़ी देर बाद बुवाई कर सकते हैं. २) रासायनिक खाद देते समय एक किलो मल्टीप्लायर खाद पर कोटिंग करके देना है, बाद में यूरिया खाद दे रहे हों, तब 250 ग्राम मल्टीप्लायर कोटिंग करके देना है. ३) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ४) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ५) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासाय...

शेडयूल मक्का फसल की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका.

मक्का- गेहूं-बाजरा बाजरी-ज्वार ज्वारी . मक्का  फसल की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    1) बुवाई करने के पूर्व बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचार करें, बीजोपचार करने के लिए एक किलो बीज में 05 ग्राम मल्टीप्लायर तथा थोडासा पानी डालकर बीजों को हाथ से हलाना है, सभी बीज काले-काले  हो जाएंगे, थोड़ी देर के बाद बुवाई कर सकते हैं. २) रासायनिक खाद देते समय खाद पर एक किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है.  ३) अगर आप दो बार यूरिया देते हैं तब आधा-आधा किलो मल्टीप्लायर यूरिया पर कोटिंग करके देना है, मतलब एक किलो मल्टीप्लायर यूरिया पर कोटिंग करके देना है. ४) रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण 20 प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा. ५) पांच से सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, उत्पादन तीन गुना तक बढ़ जाएगा.

शेडयूल धान की खेती का मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका.

शेडयूल धान की खेती का मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. चावल, (धान,भात,डांगर) निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    1) चावल की नर्सरी (पौधे) तैयार करते समय चावल के बीजों पर मल्टीप्लायर की बीजप्रक्रिया करना है, बीजप्रक्रिया करने के लिए एक किलो बीज में 05 ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी छिड़ककर बीजों को हाथ से हलाना है, सभी बीज काले-काले दिखने लगेंगे, थोड़ी देर के बाद आप नर्सरी बना सकते हैं. २) रासायनिक खाद देते समय एक किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है. ३) यूरिया खाद अगर आप दो बार देते हैं तब प्रत्येक बार 500 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाना है. मतलब एक किलो मल्टीप्लायर यूरिया खाद के साथ देना है. ४) मिटटी से उत्पन्न होनेवाले रोगों के कारण फसल में मर रोग समस्या आती है, कंपनी प्रतिनिधि से ट्रायकोडर्मा खेत पर तैयार करने की जानकारी लें, एक एकड़ का खर्चा 40 रुपये आता है. ५) आप पहले दिन से रासायनिक खाद की मात्रा 20 प्रतिसत कम करिये, उसके बाद हर साल 20 प्रतिसत रासायनिक खाद कम करना है, 05 से 07 सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा. ६) आप रासायन...

शेडयूल सोयाबीन फसल की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका.

 तिल-सरसों-सोयाबीन-मूंगफली(भुईमूग)-सूर्यफुल-एरंडी (दिवेला,एरंड)-अलसी(जवस). तिलहन फसलों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका. निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.    १) सभी बीजों को बुवाई करने के पहले मल्टीप्लायर से बीजोपचारित करें, बीजप्रक्रिया करने के लिए एक किलो बीज में 05 ग्राम मल्टीप्लायर और थोडासा पानी छिड़ककर बीजों को हाथ से हलाना है, सभी बीज काले-काले दिखने लगेंगे, थोड़ी देर के बाद आप बुवाई कर सकते हैं. 2) रासायनिक खाद पर दो किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करना है, अगर बाद में यूरिया देनेवाले हों तब आधा किलो मल्टीप्लायर बचाकर रखें यूरिया देते समय उस पर मल्टीप्लायर का कोटिंग करें. ३) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ४) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ५) मल्टीप्लायर तकन...

शेड्यूल गन्ने की खेती का मल्टीप्लायर तकनीक के साथ नियोजन.

 गन्ना, (ऊस,शेरडी) गन्ने की खेती का  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ नियोजन. निम्न शेड्यूल एक एकड़ क्षेत्र के लिए है. १) गन्ने की फसल में रासायनिक खाद देते समय प्रति एकड़ चार किलो  मल्टीप्लायर  तकनीक के साथ 250 मिली कृष्णा ऑल क्लियर रासायनिक खाद पर कोटिंग करके देना है. २) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है. ३) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है. ४)  मल्टीप्लायर  तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग प्रत्येक इस्तेमाल के बाद कम-कम होते जाएंगे. 

हरभरा पिकामध्ये मल्टिप्लायर वापराने जास्त शाखा आल्या. जेवढ्या जास्त शाखा तेवढे जास्त उत्पादन.

 चने की खेती, आधुनिक तकनीक के साथ।       १) किसान भाई का नाम-श्री लिम्बाजी अंभुरे ग्राम आकणी तहसील मंठा जिला जालना महाराष्ट्र।   २) चने की फसल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। ३) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई है।  ४) शाखाओं की संख्या ज्यादा है।  ५) सभी पत्तियों के पास फ्लावरिंग शुरू है। 

मल्टिप्लायर तकनीक से तरबूज की खेती में किडरोग की समस्या ख़तम..!!

मल्टिप्लायर तकनीक से तरबूज की खेती में किडरोग की समस्या ख़तम..!! तरबूज की खेती.  १) किसान भाई का नाम -श्री किरण पाराजी गव्हाणे ग्राम डोराले तहसील राहता जिला अहमदनगर महाराष्ट्र. २) तरबूज की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया. ३) फसल का कलर डार्क ग्रीन है, बेल की ग्रोथ में तेजी है।  ४) किड रोग समस्या नहीं है।  ५) फल लग चुके हैं, आकार ले रहे हैं। 

गहूच्या पिकामध्ये मल्टिप्लायर वापल्यानंतर काय बदल आले व मल्टिप्लायर न वापरलेल्या पिकामध्ये काय बदल आहेत ते प्रत्यक्ष व्हिडिओ मध्ये.

  गेहूं की खेती.  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ. १) किसान भाई का नाम -श्री भूषण पोपट पाटील ग्राम निजामपुर तहसील साक्री जिला धुले महाराष्ट्र. २) गेहूं की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया. ३) भूषण सर ने एक क्षेत्र में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, दूसरे क्षेत्र में नहीं किया.  ४) वीडियो में दोनों क्षेत्र दिखाए हैं, जिस क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया है, उस क्षेत्र की फसल की ग्रोथ अच्छी है, कल्लों की संख्या ज्यादा है, सभी कल्लों में लम्बी- लम्बी बालियां लगी हैं. 

गेहू के खेत में मल्टिप्लायर का उपयोग करने से रासायनिक खाद की कोई आवश्यकता नहीं लगी l

  गेहू के खेत में  मल्टिप्लायर का उपयोग करने से रासायनिक खाद की कोई आवश्यकता नहीं लगी l  गेहूं की खेती, मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।       १) किसान भाई का नाम-श्री रामकृष्ण केशवराव गाडेकर ग्राम हत्ता तहसील सेनगांव जिला हिंगोली महाराष्ट्र।  २) गेहूं की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया। ३) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई है।  ४) कल्लों की संख्या ज्यादा तथा सभी कल्लों में लम्बी-लम्बी बालियाँ लगी हैं।  ५) फसल की ग्रोथ देखकर किसान भाई ने रासायनिक खाद डालने का निर्णय रद्द किया। 

नासिक में भारी वर्षा हुई , लेकिन भारी वर्षा से आधुनिक तकनीक के गोभी की फसल पर कोई असर नहीं पड़ा है।

 गोभी की खेती आधुनिक तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री वैभव आबाजी हाळदे ग्राम चांदोरी तहसील निफाड़ जिला नाशिक महाराष्ट्र। २)  गोभी की फसल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) इस साल जहाँ भी ज्यादा बारिश थी, वहां सभी प्रकार की फसलों का नुकसान हुआ है। ४) इस साल नासिक जिले में लगातार बारिश के बावजूद गोभी की फसल पर अधिक बारिश का कोई लक्षण नहीं है।

कोबीच्या पिकाचा आकार मल्टिप्लायरच्या वापराने मोठा आला.

 मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।     १) किसान भाई का नाम-श्री राजेंद्र नरहरी उगले ग्राम बारागाव पिंप्री तहसील सिन्नर जिला नासिक महाराष्ट्र।  २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक- श्री राजेंद्र चन्द्रभान घुमरे सर।  ३) गोभी की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया।  ४) सभी पौधों के पत्तों का साइज जम्बो है।  ५) गोभी का आकार बड़ा है, वजन ज्यादा मिलेगा। 

सीताफळच्या एका झाडावर 80- 90 फळ लागले आहेत.

 सीताफल की खेती  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री विश्वनाथ देवरमणी ग्राम नागणसर तहसील अक्कलकोट जिला सोलापुर महाराष्ट्र।  २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक- आर्गेनिक भारत के शिल्पकार पुरस्कार विजेता श्री विश्वनाथ देवरमणी सर स्वयं किसान भाई भी हैं।  ३) सीताफल की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ४) यह सीताफल बाग़ दो साल की है, प्रत्येक पेड़ पर 80-90 फल लगे हैं।  ५) दो साल की बाग़ में गिनती के फल लगते हैं, ये कमाल मल्टीप्लायर तकनीक का है।  ६) मिठास अच्छी है, फलों का आकार जम्बो है। 

तुरीच्या पिकात आठ फुट अंतर ठेवलेले,मल्टिप्लायरच्या वापराने आठ फुट अंतर सुद्धा भरून गेले.

 अरहर (तूर) की खेती  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री प्रशांत लोकापुरे अक्कलकोट जिला सोलापुर महाराष्ट्र।  २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक- आर्गेनिक भारत के शिल्पकार पुरस्कार विजेता श्री विश्वनाथ देवरमणी सर।  ३) अरहर (तूर) की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ४) किसान भाई ने अरहर की फसल में आठ फुट अंतर रखा था, फसल के विस्तार ने आठ फुट का अंतर लगभग समाप्त कर दिया है।  ५) उत्पादन रिकार्ड ब्रेक करेगा। 

सुजय सर ने खीरा ककड़ी की फसल में १००% मल्टीप्लायर तकनीक का उपयोग किया और रासायनिक खाद का दाना भी नहीं डाला..!!

सुजय सर ने खीरा ककड़ी की फसल में १००% मल्टीप्लायर तकनीक का उपयोग किया और रासायनिक खाद का दाना भी नहीं डाला..!!    १) किसान भाई का नाम-श्री सुजय कारभारी ग्राम परसुल तहसील चांदवड जिला नासिक महाराष्ट्र। २) खीरा ककड़ी की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) 100 प्रतिशत मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, रासायनिक खाद का एक दाना भी नहीं डाला है। ४) पत्तों का कलर काला-काला दिख रहा है, प्रत्येक पत्ते के पास खीरा ककड़ी लग रही है।  

मिर्च की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से लागत खर्च रासायनिक खाद की तुलना में 50% कम।

मिर्च की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से लागत खर्च रासायनिक खाद की तुलना में 50% कम। मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री चंद्रकांत रमण जाधव ग्राम चिंचोले तहसील चांदवड जिला नासिक महाराष्ट्र।  २) मिर्ची की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई है।  ४) फसल स्वस्थ है, किट रोग समस्या नहीं है, रासायनिक खेती के मुकाबले खर्च आधा हुआ है।  ५) फ्लावरिंग शुरू हो गई है। 

हल्दी की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से खर्च कम करके उत्पादन बढ़कर मिला l

Image
हल्दी की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से खर्च कम करके उत्पादन बढ़कर मिला l १) किसान भाई का नाम-श्री विठ्ठल मुटकुळे ग्राम जांभरून तहसील सेनगाव जिला हिंगोली महाराष्ट्र। २) हल्दी की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) किसान भाई का कहना है की, मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल करने के बाद रासायनिक खाद बहुत कम डालना पड़ता है। ४) जितनी रकम का रासायनिक खाद कम किया जाता है, उससे कम खर्च मल्टीप्लायर तकनीक पर होता है। ५) रासायनिक खेती में खर्च ज्यादा होने के बावजूद उत्पादन कम मिलता है। ६) मल्टीप्लायर तकनीक की खेती में खर्च कम होने के बावजूद उत्पादन बढ़कर मिलता है। 

मल्टिप्लायर तकनीक से हल्दी की फसल में किड रोग नहीं है, रासायनिक खाद का स्प्रे नहीं किया तो खर्च भी कम हुआ l

मल्टिप्लायर तकनीक से हल्दी की फसल में किड रोग नहीं है, रासायनिक खाद का स्प्रे नहीं किया तो खर्च भी कम हुआ l      १) किसान भाई का नाम-श्री पंजाब नीलकंठे ग्राम सोड़ेगाव तहसील कलमनूरी जिला हिंगोली महाराष्ट्र।   २) हल्दी की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया। ३) फसल की ग्रोथ बेहतरीन हुई है।  ४) कल्लों की संख्या 6-7 है।   ५) पत्तों का आकार जम्बो है, कलर ग्रीन है। ६) पानी में घुलनशील रासायनिक खादों का छिड़काव नहीं करना पड़ा, अपितु खर्च में कमी आई।  ७) दूसरे किसान भाइयों को फसल को रोग से बचाने के लिए छिड़काव करना पड़ा, इस फसल पर कोई रोग नहीं आया।  ८ ) उत्पादन बढ़कर मिलेगा। 

लाडेकर सर की टमाटर की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक के उपयोग से कीटों का प्रकोप कम हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लागत खर्च में बचत हुई।

लाडेकर सर की टमाटर की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक के उपयोग से कीटों का प्रकोप कम हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लागत खर्च में बचत हुई। टमाटर की खेती,   मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री विश्वनाथ देवीदास लाडेकर ग्राम घोडाज तहसील कंधार जिला नांदेड़ महाराष्ट्र।  २) टमाटर की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया।  ३) फसल की ग्रोथ अच्छी हुई है, कीट रोग समस्या कम है, खर्च में बचत हुई है।  ४) ज्यादा संख्या में ताकतवर आ रहे हैं।  ५) सेटिंग अच्छी मिल रही है। 

नितीन सरांच्या द्राक्षे पिकामध्ये खर्च कमी होऊन उत्पादन जास्त मिळाले.

 अंगूर की खेती, मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।       १) किसान भाई का नाम-श्री नितिन मधुकर कोकाटे ग्राम सोमठाने तहसील सिन्नर जिला नासिक महाराष्ट्र।  २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक- श्री राजेंद्र चन्द्रभान घुमरे सर।  ३) अंगूर की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया।  ४) पत्तों का आकार जम्बो है, कलर लगातार डार्क ग्रीन बना हुआ है।   ५) अंगूर के घड बड़े साइज के तथा ज्यादा संख्या में लगे हैं।  ६) किड रोग समस्या कम से कम रहने के कारण रासायनिक दवाओं के खर्च में बचत हुई।  ७) खर्च कम हुआ है, बावजूद उत्पादन बढ़कर मिलेगा, मणि का आकार भी जम्बो मिलेगा। 

दत्तात्रय सर की अंगूर की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का उपयोग करके जम्बो आकार के अंगूर पैदा किए गए।

 अंगूर की खेती, मल्टीप्लायर  तकनीक   के साथ।       १) किसान भाई का नाम-श्री दत्तात्रय भाऊसाहेब गायकर ग्राम निमगांव वाकडा तहसील लासलगांव जिला नासिक महाराष्ट्र।   २) अंगूर की फसल में  मल्टीप्लायर  तकनीक का इस्तेमाल किया।  ३) पत्तों का आकार जम्बो है, फसल का कलर डार्क ग्रीन है।  ४) सभी घड में मणि का साइज जम्बो बन रहा है।  ५) किसान भाई का कहना है, 80 प्रतिशत उत्पादन एक्सपोर्ट होगा। 

वांगीच्या पिकात किड रोग कमी त्यामुळे खर्चात बचत.

 बैंगन की खेती  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री राजेंद्र पवार ग्राम कहांडळ वाडी तहसील सिन्नर जिला नासिक महाराष्ट्र।  २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक- राजेंद्र चन्द्रभान घुमरे सर।  ३) बैंगन की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ४) फसल पूरी तरह से स्वस्थ है तथा ग्रोथ तेज है।  ५) पत्तों का आकार जम्बो तथा कलर डार्क ग्रीन है।  ६) किड रोग समस्या नहीं होने के कारण दवाओं पर होने वाले खर्चों की बचत हो रही है। 

मल्टीप्लायर तकनीक के कारण मक्का की फसल में किसी अन्य रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं करना पड़ा।

मल्टीप्लायर तकनीक के कारण मक्का की फसल में किसी अन्य रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं करना पड़ा। मक्का की खेती  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।  १) किसान भाई का नाम श्री तुषार ठेंगड़ी लाखांदुर जिला भंडारा  महाराष्ट्र।  २) मक्का की खेती में  "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल हुआ।  ३) फसल की ग्रोथ बहुत अच्छी हुई है, भुट्टे भी ज्यादा बड़े तथा ज्यादा दानेवाले लगे हैं।  ४) "मल्टीप्लायर तकनीक" के कारण अच्छे उत्पादन के लिए किसी दूसरे उत्पाद का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा।

मक्के की फसल का प्रति एकड़ उत्पादन डबल ! मल्टीप्लायर की वजह से 30 क्विंटल का उत्पादन बढ़कर 60 क्विंटल हो गया।

मक्के की फसल का प्रति एकड़ उत्पादन डबल ! मल्टीप्लायर की वजह से 30 क्विंटल का उत्पादन बढ़कर 60 क्विंटल हो गया। मक्का की खेती से, प्रति एकड़ 60 क्विंटल उत्पादन।   १) किसान भाई का नाम-श्री ज्ञानेश्वर खांडेकर ग्राम तपकर शेटफळ तहसील पंढरपुर जिला सोलापुर महाराष्ट्र।  ३) मक्का की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ४) किसान भाई ने बताया की, सभी पौधों में कम से कम दो भुट्टे लगे हैं, बहोत सारे पौधों में चार से पांच भुट्टे लगे हैं।  ५) पिछले साल उनको प्रति एकड़ 30 क्विंटल उत्पादन मिला था, इस साल उत्पादन डबल होकर प्रति एकड़ 60 क्विंटल तक मिलने की सम्भावना है।   

बारिश के कारण मक्के की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती, लेकिन केवल "मल्टीप्लायर तकनीक" ने फसल को बचा लिया।

बारिश के कारण मक्के की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती, लेकिन केवल "मल्टीप्लायर तकनीक" ने फसल को बचा लिया। मक्का की खेती।   उत्पादन बढ़कर मिलेगा।           १) किसान भाई का नाम श्री संजय दिघे ग्राम वाड़ीगांव तहसील सांगोळा जिला सोलापुर महाराष्ट्र।   २) मक्का की खेती में "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल किया गया है। ३) किसान भाई रेगुलर मक्का की फसल लगते हैं, उनका कहना है की, इस वर्ष की बारिश में फसल पूरी खराब हो जाती, सिर्फ मल्टीप्लायर ने फसल को बचाया है।  ४) रासायनिक खेती में मक्का की ग्रोथ इतनी नहीं होती थी, पत्तों का आकार भी छोटा रहता था।

हेमराज सर के धान की खेती मे कम से कम खर्च हुआ और ज्यादा उत्पादन मिला।

 धान की खेती।  मल्टीप्लायर तकनीक के साथ।     १) किसान भाई का नाम-श्री हेमराज राकडे ग्राम भुरसी टोला तहसील अर्जुनी मोरगांव जिला गोंदिया महाराष्ट्र।  २) धान की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया।  ३) धान की वैरायटी श्रीराम है, इसमें किड रोग प्रमाण ज्यादा रहता है, बावजूद फसल किड रोग मुक्त है।  ४) कम से कम खर्च किया है, बावजूद उत्पादन बढ़कर मिलेगा। 

धान की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से कल्लों की संख्या डबल और 75 % खर्च कम..!

धान की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से कल्लों की संख्या डबल और 75 % खर्च कम..!  १) किसान भाई का नाम-श्री  विष्णु बाबर ग्राम तळिये तहसील पाटण जिला सतारा महाराष्ट्र।  २) धान की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) रासायनिक खेती में कल्लों की संख्या 10 -11 मिलती थी, इस बार 20 -22 कल्ले मिले हैं।   ४) रासायनिक खेती में आधा एकड़ में 2500 रुपये खर्च आता था, मल्टीप्लायर तकनीक में सिर्फ 1000 रुपये खर्च आया है।  ५) खर्च कम आने के बावजूद उत्पादन बढ़कर मिलेगा। 

आधुनिक तकनीक के प्रयोग से गन्ने की फसल में जाडी ज्यादा और वजन बढ़ गया।

 गन्ने की खेती  आधुनिक तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री गोविंदराव चव्हाण ग्राम पुसेगाव तहसील खटाव जिला सतारा महाराष्ट्र।  २) गन्ने की फसल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) तीसरे साल का गन्ना है, गन्ने की जाडी ज्यादा है वजन बढ़कर मिलेगा। 

गन्ने की फसल मात्र सात महीनों में 16 से 17 गन्ने तक बढ़ गई।

 गन्ने की खेती  आधुनिक तकनीक के साथ।   १) किसान भाई का नाम-श्री अनिल मोरे ग्राम आष्टा कासार तहसील लोहारा जिला उस्मानाबाद महाराष्ट्र।  २) गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ३) सात महीने की फसल है, गन्ने की जाडी ज्यादा है तथा गन्ना 16-17 कांडी का हो गया है ।  ४) किसान भाई का कहना है की, मिट्टी नरम बन रही है, फसल की ग्रोथ भी अच्छी मिल रही है।  

मल्टीप्लायर तकनीक से ज्ञानेश्वर सर के गन्ना की फसल में उत्पादन 50% से अधिक की वृद्धि।

मल्टीप्लायर तकनीक से ज्ञानेश्वर सर के गन्ना की फसल में उत्पादन  50% से अधिक की वृद्धि।      १) किसान भाई का नाम-श्री ज्ञानेश्वर शिवणकर ग्राम हिंगे वाठार तहसील भोर जिला पुणे महाराष्ट्र।    २) गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।  ३) कल्लों की संख्या ज्यादा मिली सभी कल्ले एकसमान बढ़ने से उत्पादन बढ़कर मिलना है।  ४) किसान भाई का कहना है की, पहले प्रति एकड़ 45 टन तक उत्पादन आता था, इस बार उत्पादन 65 टन तक मिलेगा।