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Showing posts from August, 2022

ब्रोकोली फसल तेजी से बढ़ी, उत्पादन अच्छा मिला!

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  Brokoli ब्रोकोली उत्पादन बाजार में जा रहा है. १) किसान भाई का नाम श्री गणेश जयवंतराव कदम गांव हिवरगांव डोंगरगाव तहसील अकोले जिला अहमदनगर महाराष्ट्र, गणेश सर स्वयं कंपनी के प्रतिनिधि हैं, उन्होंने फ्लावर की खेती में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. २) एक एकड़ क्षेत्र पर फ्लावर की फसल लगाईं थी, 250 ग्राम मल्टीप्लायर तीन बार पानी के साथ दिया. ३) फसल पर दो बार मल्टीप्लायर का छिड़काव किया. ४) फसल तेजी से बढ़ी, उत्पादन अच्छा मिला.

ड्रैगन फ्रूट,यह फ्रूट ५० रुपये किलो भी बिकता है, तब भी किसान भाई अच्छे पैसे कमा सकता है!

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ड्रैगन फ्रूट,यह फ्रूट ५० रुपये किलो भी बिकता है, तब भी किसान भाई अच्छे पैसे कमा सकता है..!! १) नाशिक जिले के किसान भाई हमेशा कुछ नया सोचते है, और उसे सक्सेस भी करते है, भारत में अनेक किसान भाइयों ने ड्रेगन फ्रूट लगाया था, परंतु प्रत्यक्ष में फ्रूट का उत्पादन सिर्फ ३ किसान भाई ले सके, उनमें से एक हैं कैलाश मानसिंग कचवे उर्फ़ कैलाश आबा. २) कैलाश आबा की खेती मालेगांव तहसील के दाहिदी गांव में है, कैलाश आबा अनार की खेती करते है, आज सभी किसान भाई अनार की खेती में आनेवाले तेल्या रोग से परेशान है, परंतु कैलाश आबा के खेत में तेल्या रोग आज तक नहीं आया. ३) कैलाश आबा को खेती के काम में सम्पूर्ण सहकार्य मिलता है, उनके ज्येष्ठ सुपुत्र देवीदास कचवे का, आबा बड़े किसान भाई है, समाज में प्रतिष्ठित होने के कारण उनका बहोत सा समय सामाजिक कार्यों में व्यतीत होता है, इसलिए खेती का पूरा काम उनके सुपुत्र देवीदास सँभालते है. ४) मेने देवीदास जी से पूछा की आपने कैसे सक्सेस किया इस कठिन खेती को, तब उन्होंने बताया की मेने पहले ही दिन से ड्रेगन बाग़ को रासायनिक खाद नहीं डाला, बाग़ का पूरा नियोजन आर्गनिक है, गर्मी के म...

फणस, कटहल, Jackfruit बूढ़े को जवान बनाता है मल्टीप्लायर!

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बूढ़े को जवान बनाता है मल्टीप्लायर!   १) लोकही जिला मधुबनी बिहार से विजयकुमार मंडल सर ने कटहल के पेड़ का फोटो भेजा है, यह पेड़ ३० साल का है, बूढ़ा हो जाने के कारण पिछले कई सालों से उत्पादन कम हो गया था, किसान भाई शिवकुमार जी ने इस पेड़ को जवान बनाने के लिए हर महीने ४०० ग्राम मल्टीप्लायर ३ बार दिया, मल्टीप्लायर ने तुरंत अपना काम सुरु किया | २) आप फोटो देखिये पूरा पेड़ नए पत्तों से भर गया है, पेड़ पर जहाँ भी देखो कटहल ही कटहल नजर आ रहे है, इस पेड़ की अवस्था से सभी किसान भाई भी परिचित थे, इसलिए जो भी पेड़ को देखता है वो पूछता है, आपने इस पेड़ को क्या डाला है |

सौंफ की खेती, फसल को देखकर सभी का कहना है की, उत्पादन बढ़कर मिलेगा!

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  सौंफ की खेती, १) किसान भाई का नाम श्री कल्पितभाई महेन्द्रभाई पटेल ग्राम देशाईपुराकंपा तहसील बायड जिला अरावली गुजरात. २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता श्री डाहयाभाई छगनभाई पटेल सर. ३) सौंफ की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ४) किसान भाई को खर्च कम आया है, अच्छे उत्पादन के लिए किसी महंगे उत्पाद का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा. ५) फसल को देखकर सभी का कहना है की, उत्पादन बढ़कर मिलेगा.

याकोन रताळ की खेती,यह फल एक आयुर्वेदिक वनस्पति भी है!

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१) किसान भाई का नाम- श्री हर दयाल उर्फ़ अजय डोगरा ग्राम राचोली तहसील रामपुर जिला शिमला हिमाचल प्रदेश। २) मार्गदर्शक तथा मल्टीप्लायर विक्रेता- श्री हरदयाल डोगरा सर स्वयं ३) याकोन की खेती में "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल किया। ४) यह यूरोप का फल है, इसे जमीन के अंदर उगनेवाला सेब भी कहा जाता है। ५) यह फल एक आयुर्वेदिक वनस्पति भी है।

किटक तथा रोगों पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा!

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  स्ट्रॉबेरी   किटक तथा रोगों पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा! १) सातारा जिले में स्ट्राबेरी की खेती की जाती है, इस फसल में किटक अटैक की समस्या ज्यादा है, कोली ( माइट्स ) के कंट्रोल पर किसान भाई का बहोत पैसा खर्च हो जाता है, कल तक ऐसा लगता था की इसका कोई पर्याय नहीं है, शिगवण सर ने ग्राम केडंबे तालुका जावली से स्ट्राबेरी की फसल के फोटो भेजे है, इस फसल में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होने के कारण उत्पादन भी जोरदार मिला और किटक तथा रोगों पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा ।

संत्रा की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से बगीचा सभी समस्याओं से मुक्त है..!!

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संत्रा की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से बगीचा सभी समस्याओं से मुक्त है..!! 1) किसान भाई का नाम श्री राजेंद्र सरसे पांढुर्ना जिला छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश 2) संत्रा की खेती में अनेक समस्याएं हैं, जैसे फूल का झाड़ जाना, फूल अचानक गिर जाने से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता. 3) किटक समस्या के निदान पर भी बहोत पैसा खर्च हो जाता है, पेड़ों का ऊपर से सुखना, डगालों का अचानक सुखना. 4) किसान भाई पिछले एक वर्ष से उनके बगीचे में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनका कहना है की, आज मेरा बगीचा सभी समस्याओं से मुक्त है, रासायनिक खाद भी 50 % रह गया है, आनेवाले साल में और कम हो जाएगा, खर्च पहले के मुकाबले बहोत कम हुआ है.

मल्टीप्लायर तकनीक की खेती देखने किसान भाई दूर-दूर से आ रहे है..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक की खेती देखने किसान भाई दूर-दूर से आ रहे है..!! १) किसान भाई का नाम कनुभाई पटेल ग्राम राजनगर तहसील वाघोड़िया जिला बरोडा, २) किसान भाई के पौधे पत्तियां सुखकर मर रहे थे, २ बार ५०० ग्राम मल्टीप्लायर खेत में पानी भरते समय दिया. ३) ६ बार फसल पर १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ४) तुरंत पौधों का मरना रुक गया, पौधे तेजी से बढ़ने लगे, शाखाओं का विस्तार तेजी से हुआ. ५) फसल ताकतवर बन जाने से ताकत का फायदा उत्पादन के स्वरूप में मिलना प्रारम्भ हो गया है, लोम जिसमें एरंड लगनेवाली है, उसका आकार बहोत ही बड़ा है, पूरा एरंड से भर गया है. ६) सभी पौधों में कम से कम ७-८ लूम हैं पुरे एरंड से भरे हैं, ज्यादातर पौधों पर लूम की संख्या १५ से १९ है. ७) फसल जो मर रही थी उसने उत्पादन का रेकार्ड ब्रेक कर दिया, दूर-दूर से किसान भाई फसल को देखने आ रहे हैं.

उत्पादन में ५० प्रतिशत से ज्यादा बढत मिलेगी!

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एरंडी का उत्पादन बढिया और कीटक रोग गायब !

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 एरंडी 

सूर्यफुल की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से उत्पादन प्रति एकड़ ६ क्विंटल से बढ़कर ९ क्विंटल तक..!!

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सूर्यफुल की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से उत्पादन प्रति एकड़ ६ क्विंटल से बढ़कर ९ क्विंटल तक..!! १) किसान भाई का नाम रमणभाई मंगलुभाई पटेल नीझर जिला तापी गुजरात, २) किसान भाई हमेशा सूर्यफुल लगाते हैं, इस बार उन्होंने ४ एकड़ क्षेत्र पर मल्टीप्लायर की मदत से खेती की. ३) बीजों की बुवाई करते समय प्रति एकड़ एक किलो मल्टीप्लायर रासायनिक खाद में मिलाकर दिया. ४) २० दिन के बाद ८ दिन के अंतर से २ बार, १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर, फसल पर छिड़काव किया. ५) फसल तेजी से बढ़ने लगी, पहले दिन से फसल का कलर डार्क ग्रीन बना रहा, फसल ने सूर्यप्रकाश की मदत से ज्यादा भोजन बनाया, इसलिए फूल बड़े आकार के निकले, आप फोटो में देख सकते हैं, फूल एकसमान हैं तथा पुरे भरे हुए हैं. ६) किसान भाई का कहना है की इस बार उत्पादन प्रति एकड़ ६ क्विंटल से बढ़कर ९ क्विंटल तक आएगा.

मल्टीप्लायर तकनीक से सरसों की फसल में पानी की कमी थी लेकिन फसल पर कोई प्रभाव नहीं, पर उत्पादन बढ़कर मिला..!!

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 मल्टीप्लायर तकनीक से सरसों की फसल में पानी की कमी थी लेकिन फसल पर कोई प्रभाव नहीं, पर उत्पादन बढ़कर मिला..!! १) किसान भाई का नाम हुकुमचंद ग्राम बैलोदी तहसील पाटन जिला दुर्ग, इस वर्ष छत्तीसगढ़ में पानी की कमी है, मल्टीप्लायर की मदत से आप कम पानी में भी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. २) किसान भाई ने ७ एकड़ क्षेत्र में सरसों की फसल लगाईं थी, फसल लगाते समय प्रति एकड़ १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया. ३) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर २ बार छिड़काव किया. ४) सरसों की ऊंचाई ६.५ से ७ फुट है, फसल पर पानी की कमी का कोई प्रभाव नहीं है, उत्पादन बढ़कर मिलेगा ऐसा सत्य प्रकाश सर का कहना है.

सरसों की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से नीचे से ऊपर तक पौधे में फलियां ही फलियां..!!

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सरसों की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से नीचे से ऊपर तक पौधे में फलियां ही फलियां..!! १) किसान भाई का नाम टेकराम प्रधान ग्राम भाटली तहसील बरमकेला जिला रायगढ़, २) किसान भाई ने सरसों के बीज खेत में लगाने के पहले मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचार किया. ३) सेंद्रिय खाद में १ किलो मल्टीप्लायर मिलाकर दिया. ४) फसल को प्रकृति के द्वारा मिलनेवाला बिनामूल्य भोजन मिलने लगा, फसल में शाखाओं की संख्या ज्यादा मिली, ऊंचाई भी रेकार्ड थी. ५) उत्पादन इतना लगा की, नीचे से ऊपर तक पौधे में फलियां ही फलियां दिख रही हैं, निश्चित उत्पादन बढ़कर मिलेगा.

सरसों की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से उत्पादन खर्च रासायनिक से भी कम उत्पादन बढ़कर मिला..!!

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सरसों की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से  उत्पादन खर्च रासायनिक से भी कम उत्पादन बढ़कर मिला..!! १) किसान भाई का नाम शंकर जाधव ग्राम आलूर तहसील उमरगा जिला उस्मानाबाद, २) किसान भाई पिछले १ साल से मल्टीप्लायर का इस्तेमाल कर रहे हैं, कंपनी की सलाह अनुसार रासायनिक खाद धीरे-धीरे कम करना चाहिए, परन्तु किसान भाई ने ज्वार तथा सरसों की फसल में १ दाना भी रासायनिक खाद का नहीं डाला, फिर भी उत्पादन ज्यादा मिलेगा. ३) फसल लगाते समय १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया. ४) १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक १५ दिन के अंतर से छिड़काव किया. ५) फसल के पत्ते ज्यादा चौड़े बड़े आकार के तथा गहरे हरे रंग के हैं, ग्रोथ शानदार हुई है, सरसों में जबरदस्त फ्लावरिंग आई है. ६) किसान भाई को उत्पादन खर्च रासायनिक के मुकाबले बहोत कम है, फिर भी उत्पादन बढ़कर मिलेगा.

मल्टीप्लायर तकनीक ने किया कमाल सरसों की फसल में उत्पादन डबल !

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मल्टीप्लायर तकनीक ने किया कमाल सरसों की फसल में उत्पादन डबल ! १) दोस्तों अन्वेष काम्बोज सर ने सहारनपुर उत्तरप्रदेश से सरसों की फसल के फोटो भेजे है, काम्बोज सर ने बताया फसल की ऊंचाई ९ फुट है, इस फसल ने आज तक के सभी रेकार्ड ध्वस्त कर दिए, दोस्तों एक बार मेने लिखा था बाहुबली है मल्टीप्लायर, वह बात सच साबित कर रहा है मल्टीप्लायर | २) पंजाब, बिहार तथा उत्तरप्रदेश में सरसों की खेती ज्यादा होती है, आज तक ५ से ६ फुट तक ऊँची सरसों की फसल देखी गई है, परन्तु इस फसल ने पुराने सभी रेकार्ड पुराने करके रेकार्ड का नया कीर्तिमान बनाया है, जिसे कोई तोड़ सकता है, तो सिर्फ मल्टीप्लायर ही तोड़ सकता है | ३) आप फसल के फोटो झूम करके देखिये, नीचे से ऊपर तक इतनी सरसों लगी है, की सरसों का पौधा वजन के कारण झुक गया है, सरसों की फसल की ऊंचाई तो कम होती है, पौधे पर इतनी सरसों नहीं लगती, जितनी इन पौधों पर लगी है | ४) धीरे -धीरे देखते जाइए होता है क्या.... प्रत्येक फसल अपने पुराने रेकार्ड तोड़ कर नए रेकार्ड बनाएगी, मल्टीप्लायर हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित करायेगा, दोस्तों अब किसान भाई को गरीब मत बोलना, भारत का किसान द...

अदरक की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से पत्ते डार्क ग्रीन और उत्पादन बढ़कर मिलेगा !

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अदरक की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से पत्ते डार्क ग्रीन और उत्पादन बढ़कर मिलेगा ! १) किसान भाई का नाम -अमित गणपत सालुंके सतारा महाराष्ट्र. २) फसल का नाम -अदरक ३) अमित सर ने अदरक की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ४) ख़ास वैशिष्ठ्य -अदरक की फसल हमेशा पीले रंग की होती है, सूर्यप्रकाश की मदत से हरे पत्तों पर ज्यादा भोजन बनता है, पत्तों का कलर जितना कम हरा होता है, भोजन उतना कम बनता है, "मल्टीप्लायर तकनीक" का इस्तेमाल करने से फसल के पत्ते डार्क ग्रीन रंग के बन गए हैं, इसलिए हर दिन ज्यादा भोजन बन रहा है, मतलब उत्पादन भोजन के प्रमाण में बढ़कर मिलेगा.

अदरक की पत्तियां हमेशा पीले कलर के होते है, लेकिन मल्टीप्लायर तकनीक से पत्ते ग्रीन कलर हो गया..!!

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अदरक की पत्तियां हमेशा पीले कलर के होते है, लेकिन मल्टीप्लायर तकनीक से पत्ते ग्रीन कलर हो गया..!! १) किसान भाई का नाम मधुकर मगर कन्नड़ जिला औरंगाबाद, इन्होने अदरक की फसल लगाईं थी, उन्होंने स्वयं के खेत में रिझल्ट देखने का निर्णय लिया, आज उनके खेत में जो चमत्कार हुआ है, उसे देखने के लिए किसान भाई उनके खेत में आ रहे हैं. २) किसान भाई ने एक एकड़ क्षेत्र में २५० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से दिया और १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ३) अदरक की फसल के पत्ते हमेशा पीले कलर के होते हैं, मल्टीप्लायर देने के बाद सभी पत्ते ग्रीन कलर के हो गए तथा उनकी चौड़ाई भी बढ़ गई, पत्ते हरे होने पर उत्पादन ज्यादा मिलता है, यह बात किसान भाई जानता है, परन्तु कितना भी खर्च करो पत्ते हरे नहीं बनते. ५) आप सभी जानते हैं की, फसलों का भोजन सूर्यप्रकाश की मदत से बनता है, तथा हरे पत्तों पर ज्यादा बनता है, इस फसल से रेकार्ड ब्रेक उत्पादन मिलेगा.

मल्टीप्लायर तकनीक से अदरक फसल के पत्ते डार्क ग्रीन बन गए..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से अदरक फसल के पत्ते डार्क ग्रीन बन गए..!! १) किसान भाई का नाम श्री नवनाथ सीताराम किरदल सातारा महाराष्ट्र, २) अदरक की फसल लगाने के 30 दिन बाद एक किलो मल्टीप्लायर पानी के साथ दिया. ३) 60 दिन के बाद फसल पर १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ४) अदरक की फसल में पत्तों का कलर हमेशा पीला रहता है, पीले पत्तों पर सूर्यप्रकाश की मदत से कम भोजन बनता है, इसलिए उत्पादन भी कम मिलता है. ५) मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होने से अदरक की फसल के पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बन गया, इसलिए उत्पादन बढ़कर मिलना है साथ में ग्रोथ भी ज्यादा मिल रही है.

मल्टीप्लायर तकनीक से अदरक की फसल से प्रत्येक पौधे 1500 ग्राम वजन की मिले..!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से अदरक की फसल से प्रत्येक पौधे 1500 ग्राम वजन की मिले..!! १) किसान भाई का नाम श्री प्रवीण सरकाले ग्राम सकेलवाडी तहसील कोरेगाव जिला सातारा महाराष्ट्र. २) यह पोस्ट टेलीग्राम तथा फेसबुक पर पोस्ट क्रमांक 1067 नंबर पर पोस्ट की गई थी.

उत्पादन तो बढ़कर मिला भाव भी ज्यादा मिला!

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  १) किसान भाई का नाम सीताराम सिनालकर ग्राम रणमला तहसील आंबेगाव जिला पुणे, इनको कंपनी के प्रतिनिधि विकास सिनालकर सर ने मल्टीप्लायर की जानकारी दी. २) किसान भाई ने १ किलो मल्टीप्लायर रासायनिक खाद में मिलाकर दिया. ३) फसल ३० दिन की होने के बाद १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर २ बार छिड़काव किया. ४) फसल ३५ दिन की होने पर १ किलो मल्टीप्लायर पानी भरते समय पानी के साथ दिया. ५) फसल लगातार तेजी से बढ़ती रही, पत्तों का आकार बड़ा बन गया, फसल ज्यादा भोजन बनती रही, इसलिए ७० दिन में बीट तैयार हो गया. ६) सिर्फ रासायनिक खाद में ३ से ४ साइज का उत्पादन मिलता है, इस फसल में ८० प्रतिसत उत्पादन जम्बो आकार का मिला है, उत्पादन तो बढ़कर मिला भाव भी ज्यादा मिला.

पत्तियों का आकार बड़ा मिला, ऊंचाई ज्यादा मिली!

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  १) किसान भाई का नाम सुरेश सिनालकर ग्राम रणमला तहसील आंबेगाव जिला पुणे, इनको कंपनी के प्रतिनिधि विकास सिनालकर सर ने मल्टीप्लायर की जानकारी दी. २) किसान भाई पिछले १ साल से मल्टीप्लायर का इस्तेमाल कर रहे हैं, मल्टीप्लायर की ताकत से परिचित होने के कारण उन्होंने देशी गाजर की फसल में रासायनिक खाद का एक दाना भी नहीं डालने का निश्चय किया. ३) पानी भरते समय ५००-५०० ग्राम २ बार पानी के साथ दिया. ४) फसल १५ दिन की होने से लेकर फसल तैयार होने तक प्रत्येक १५ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ५) फसल लगातार तेजी से बढ़ती रही, प्रकृति से बिनामूल्य भोजन मिलता रहा, पत्तियों का आकार बड़ा मिला, ऊंचाई ज्यादा मिली. ६) खर्च बहोत कम हुआ, उत्पादन बढ़कर मिला.

मल्टीप्लायर तकनिक से मसूर दाल में उत्पादन ३ गुना बढ़ गया..!!

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मल्टीप्लायर तकनिक से मसूर दाल में उत्पादन ३ गुना बढ़ गया..!! १) मोहम्मद शोएब साहब की खेती ग्राम अलोरी तहसील टोंक खुर्द जिला देवास मध्यप्रदेश में है, तहसील के बहुतांश गांवों में बोथी मिटटी है, वहां अक्टोबर महीने के बाद मसूर दाल की खेती की जाती है, उत्पादन एक बीघा क्षेत्र में १०० किलो तक आता है, परंतु कोई पर्याय नहीं होने के कारण मसूर की खेती की जाती है. २) शोएब जी पिछले १ साल से अपनी तरह-तरह की फसलों में लगातार मल्टीप्लायर का इस्तेमाल कर रहे है, इनके खेत की मिटटी में काफी परिवर्तन दिखाई दे रहा है. ३) इन्होंने भी दूसरे किसान भाइयों की तरह मसूर की खेती १० बीघा क्षेत्र में लगाईं, हमेशा १ बीघा क्षेत्र में ५० किलो म्यूरेट ऑफ पोटास देते थे, इस बार इन्होंने ५०० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर २५ किलो म्यूरेट ऑफ पोटास दिया. ४) प्रत्येक १५ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया, लगातार मल्टीप्लायर का छिड़काव होते रहने से फसल तेजी से बढ़ती रही, फसल का कलर डार्क ग्रीन बना रहा. ५) कीटक तथा रोगों के लिए ज्यादा छिड़काव नहीं करना पड़ा, छिड़काव में रासायनिक दवा के साथ मल्टीप्लायर...

फसल तूर की इल्ली का पता नहीं!

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  फसल तूर की इल्ली का पता नहीं! १) किसान भाई का नाम सचिन भाई ग्राम तुलजापुर गड़ी तहसील चांदुर बाजार जिला अमरावती, किसान भाई को कंपनी के प्रतिनीधि प्रवीण बिरे सर ने मल्टीप्लायर की मदत से बलवान फसल से ज्यादा उत्पादन प्राप्त करने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर फसल पर १०-१० दिन के अंतर से २ बार छिड़काव किया. ३) फसल बलवान बन जाने के कारण फूल इतनी ज्यादा मात्रा में आये हैं की, पौधों पर पत्तियां कम फूल ही फूल नजर आ रहे हैं. ४) कमजोर फसल ही किड और रोगों का शिकार बनती है, भरी मात्रा में फूल आ गए हैं, फली में परिवर्तित हो रहे हैं, परन्तु अभी तक इल्ली का नामोनिशान नहीं है.