शेडयूल आलू (बटाटा) गाजर-बीट (चुकंदर) प्याज (कांदा) लस्सन (लहसुन) रतालू-अरबी (अरवी,अरुम) सुरन,जमीकंद.

 आलू (बटाटा) गाजर-बीट (चुकंदर) प्याज (कांदा) लस्सन (लहसुन) रतालू-अरबी (अरवी,अरुम) सुरन,जमीकंद.

मिटटी के अंदर लगनेवाली सब्जियों की खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ करने का तरीका.

निम्न नियोजन एक एकड़ क्षेत्र के लिए है.

१) बीजों को मल्टीप्लायर से बीजोपचारित करके लगाना है, बीजोपचार करने के लिए एक किलो बीज में पांच ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर बीजों के साथ रगड़ना है, सभी बीज काले-काले हो जाएंगे, थोड़ी देर के बाद लगा सकते हैं.

२) कंद लगाने के पहले 10 लीटर पानी में 50 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर उसमें कंद डुबाकर लगाना है.

३) रासायनिक खाद देते समय रासायनिक खाद पर २ किलो मल्टीप्लायर का कोटिंग करके देना है.

४) किटक समस्या के लिए किसी रासायनिक दवा का छिड़काव करना हो, तब उसमें कृष्णा नारायणअस्त्र प्रति पंप पांच मिली तथा कृष्णा ऑल क्लियर प्रति पंप दो मिली मिलाने से ज्यादा अच्छा परिणाम मिलता है.

५) किसी भी छिड़काव में स्प्रे प्लस प्रति पंप एक मिली मिलाने से छिड़काव का घोल पत्तों से जमीन पर नहीं गिरता, घोल पत्तों के अंदर प्रवेश करके, पत्तों के पीछे छिपे कीड़ों तक पहुँच जाता है.

६) मल्टीप्लायर तकनीक से खेती करने से हर साल उत्पादन बढ़कर मिलता है, हर साल रासायनिक खाद 20 प्रतिसत कम करिये, सात सालों में आपकी खेती आर्गनिक बन जायेगी, रासायनिक खाद का इस्तेमाल शून्य हो जाएगा, किड रोग प्रत्येक इस्तेमाल के बाद कम-कम होते जाएंगे. 

Comments

Popular posts from this blog

२ एकड़ में १७५ टन उत्पादन !

बिना पानी का गेहूं फिर भी, १ एकड़ में १५ क्विंटल उत्पादन मिला |

मल्टीप्लायर तकनीक से किड रोग में कंट्रोल के साथ उत्पादन में बढ़त..!!