उत्पादित निम्बू का रिजल्ट देखकर पतंजलि ने पसंद किया मल्टीप्लायर तकनीक को..!!

उत्पादित निम्बू का रिजल्ट देखकर पतंजलि ने पसंद किया मल्टीप्लायर तकनीक को..!!

१) किसान भाई जैविक पद्धति से निम्बू कि खेती करना चाहता था, इसलिए उन्होंने रासायनिक खाद का एक दाना भी नहीं डाला, निम्बू के पौधे पीले पड़ने लगे, सभी पत्तियां पिली हो गई, पौधों की ग्रोथ थम सी गई, किसान भाई परेशान करे तो क्या करे.

२) किसान भाई का नाम है महेश खंडेलवाल, इनकी खेती अमझेरा जिला धार मध्यप्रदेश में है, इन्होंने भरूच गुजरात से थाईलैंड जाती के निम्बू के ५०० पौधे मंगाए, उसके बाद एक और किसान भाई ने ५०० और किसान भाई राजकुमार मालवी ने ४५०० पौधे लगाए.

३) खेती पूरी तरह से जैविक होने के कारण रासायनिक खाद नहीं डाला था, पौधों को आवश्यक मात्रा में भोजन नहीं मिलने के कारण किड का अटेक हो गया था, किटकों ने पत्तों से रस चूस लेने के कारण पत्ते पीले पड़ रहे थे, ग्रोथ पूरी तरह से रुक गई थी.

४) लगभग डेड महीने पहले महेश खंडेलवाल सर ने मल्टीप्लायर मंगवाकर उसे जमीन से दिया और उसका छिड़काव किया, आज पुरे बगीचे के पत्ते हरे-हरे हो गए हैं, नए फूल लग रहे हैं, पौधों के बढ़ने की गति तेज हो गई है.

५) किसान भाई राजकुमार मालवी साहब ने ४५०० पौधे लगाए थे, खंडेलवाल सर ने मल्टीप्लायर का रिझल्ट देखने के बाद २ पेटी मल्टीप्लायर राजकुमार जी के यहाँ भिजवा दिया.

६) इंदौर से पतंजलि के अधिकारी बगीचे को देखने आये, उन्होंने निम्बू का सेम्पल हरिद्वार भेजा सेम्पल पास हो गया है, अब अमझेरा में उत्पादित निम्बू पतंजलि खरीदेगी.







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