लसुन की आर्गनिक खेती, फिर भी उत्पादन रासायनिक से ज्यादा.
लसुन की आर्गनिक खेती, फिर भी उत्पादन रासायनिक से ज्यादा.
१) आज तक आर्गनिक खेती की जितनी भी तकनीक खोजी गई हैं, उसमें आर्गनिक खेती का उत्पादन कम आता है. इसलिए किसान भाई आर्गनिक खेती की तरफ जाने को तैयार नहीं हैं.
२) मल्टीप्लायर की मदत से की जानेवाली आर्गनिक खेती प्रणाली में उत्पादन पहले दिन से रासायनिक से ज्यादा मिलता है, किड रोग कम हो जाते हैं, और खर्च भी रासायनिक खेती के मुकाबले कम है. परंतु जिस खेत की मिट्टी बहोत ज्यादा ख़राब हो गई है, वहां रासायनिक खाद धीरे-धीरे कम करना पड़ेगा. ३) लोकेश पटेल देवास जिले में सभी के परिचित तथा प्रगतिशील किसान हैं, इनकी खेती, ग्राम लोहारी जिला देवास मध्यप्रदेश में है, इन्होंने इसके पहले भी मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया था, इसलिए लसुन की खेती १०० प्रतिसत आर्गनिक करने का निर्णय लिया. ४) लसुन की बुवाई करने के बाद १ बीघा क्षेत्र में १ किलो जमीन से दिया, और प्रत्येक १० से १५ दिन के अंतर से मल्टीप्लायर का छिड़काव किया, फसल पहले ही दिन से रासायनिक से आगे थी, गाव में सबसे अच्छी फसल लोकेश सर की है, ऐसा कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. ५) आप फोटो झूम करके देखिये फसल की ऊंचाई जबरदस्त है, पत्तों की जाड़ी भी अविश्वसनीय है, अभी १ पानी देना बाकी है, उसके बावजूद लसुन का साइज जम्बो है, मतलब जब तक फसल पूरी तरह से तैयार होगी, लस्सन सुपर जम्बो साइज का बन जायेगा. ६) साइज बड़ा बनेगा तो रेट भी ज्यादा मिलेगा, साथ में उत्पादन भी बढ़कर मिलना है, लोकेश जी का कहना है कि, २५ से ३० क्विंटल उत्पादन अच्छा माना जाता है, परंतु इस बार ३५ से ४० क्विंटल उत्पादन मिलने की सम्भावना है. ७) लोकेश सर को आर्गनिक तथा बढ़ा हुआ उत्पादन लेने के लिए आनंद धूत सर ने मार्गदर्शन किया है.



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