खर्च कम होकर उत्पादन बढ़ गया.

 १) जिस फसल को आवश्यकता के अनुरूप भोजन मिलता है, वह फसल उत्पादन तो ज्यादा देती है, किड रोग को भी पास फटकने नहीं देती, यह कमाल है मल्टीप्लायर का.

२) किसान भाई सचिन शिवाजी मोकाशी इनकी खेती ग्राम तळसंदे तहसील हातकणंगले जिला कोल्हापूर में है, कंपनी के डीलर सुजीतकुमार शिंदे सर ने मल्टीप्लायर के साथ कम खर्चे में फायदे की तथा ज्यादा उत्पादन देनेवाली खेती का मार्ग बताया. ३) किसान भाई पिछले १ साल से मल्टीप्लायर का अलग-अलग फसलों में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्होंने धीरे-धीरे रासायनिक खाद कम-कम करना प्रारम्भ कर दिया है, कुछ दिनों में इनकी खेती १०० प्रतिसत आर्गनिक हो जायेगी. ४) किसान भाई ने ७ गुंठा ( आर ) क्षेत्र में तुरई की फसल लगाईं, प्रति सप्ताह १०० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन ( टपक पद्धत ) से लगातार दे रहे हैं, पहला उत्पादन ६० किलो निकला था, अब लगातार १ दिन के अंतर से ४० किलो निकल रहा है. ५) फायदे की बात यह है कि, खर्च रासायनिक खेती के मुकाबले काफी कम हो गया है, उत्पादन बढ़कर मिल रहा है.




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