घेवड़ा, बरबटी बिन्स की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से पहले दिन से आर्गनिक खेती, फिर भी उत्पादन ज्यादा.

घेवड़ा, बरबटी बिन्स की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से पहले दिन से आर्गनिक खेती, फिर भी उत्पादन ज्यादा. 

१) लाखों करोड़ों किसान भाई रासायनिक खेती से परेशान हो गए हैं, परंतु रसायन बंद करते ही उत्पादन ७० प्रतिसत तक कम हो जाता है, मधुकर दगड़े ग्राम मोरोची तहसील मालसिरस जिला सोलापुर, भी इसी समस्या से निजात पाना चाहते थे.

२) आप मल्टीप्लायर की मदत से पहले दिन से आर्गनिक खेती कर सकते हैं, उत्पादन कम होने के बजाये बढ़कर मिलेगा, किड तथा रोगों पर जहरीली दवाओं के इस्तेमाल से धीरे-धीरे मुक्ति मिल जाएगी. ३) मधुकर सर तुरंत तैयार हो गए, उन्होंने आम, चीकू,करेला,बिन्स,मिर्ची इत्यादि सभी फसलों को रासायनिक खाद बंद करके सिर्फ मल्टीप्लायर दिया, आम के पेड़ों को छोड़कर सभी फसलों को प्रत्येक आठ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव करते हैं और १५ दिन में, १५ लीटर पानी में ५ मिली आल क्लियर मिलाकर छिड़काव करते हैं. ४) मधुकर जी के गांव में जितने किसान भाइयों ने मिर्ची लगाईं है, महंगी दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद उनकी फसल पर व्हायरस आ गया है, मधुकर जी ने सिर्फ मल्टीप्लायर और आल क्लियर का ही इस्तेमाल किया है, उनकी फसल पर व्हायरस का कोई लक्षण नहीं है. ५) एक और महत्वपूर्ण बात यह की मधुकर जी की खेती की जमीन मुरुमवाली है, इसलिए हर साल गोबर का खाद डालना पड़ता है, इस साल मधुकर जी ने गोबर खाद भी नहीं डाला उसके बावजूद सिर्फ फसल अच्छी ही नहीं उत्पादन भी बढ़कर मिल रहा है.



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