तरबुज फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से प्रतिकूल परिस्तिथि में भी ३ एकड़ से ६० टन उत्पादन |
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तरबुज फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से प्रतिकूल परिस्तिथि में भी ३ एकड़ से ६० टन उत्पादन |
१) किसान भाई का नाम संजय पवार मालेगांव जिला नाशिक, इन्होने ३ एकड़ क्षेत्र में तरबूज की फसल लगाईं थी,
२) फसल लगाकर १५ दिन हो चुके थे, किसान भाई ने प्रत्येक ०५ दिन के अंतर से २०० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से देना प्रारम्भ किया. ३) प्रत्येक ५ दिन के अंतर से मल्टीप्लायर १५ ग्राम + कृष्णा ऑल क्लियर २ मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस १ मिली मिलाकर छिड़काव किया. ४) हर दिन फसल में एक नया बदलाव दिखने लगा, फसल की ग्रोथ रेकॉर्ड ब्रेक हुई, शाखाओं की संख्या ज्यादा मिली, फूल, फल में परिवर्तित होने के बाद, फल तेजी से बढ़ने लगे. ५) यह जानकारी मुझे ९ नोव्हेम्बर को प्राप्त हुई थी, किसान भाई का कहना है की, इस बार समस्याएं बहोत ज्यादा थी, प्रतिकूल परिस्तिथि में भी ३ एकड़ खेत से ६० टन उत्पादन मिला.
२ एकड़ में १७५ टन उत्पादन| १) किसान भाई का नाम रविंद्र प्रल्हादराव शिंदे ग्राम कोपर्ड़े तहसील खंडाला जिला सतारा, महाराष्ट्र २)किसान भाई को गन्ने की खेती की जानकारी दी गयी की, मल्टीप्लायर के साथ रासायनिक कम से कम इस्तेमाल करने के बावजूद उत्पादन बढ़कर मिलेगा. ३) किसान भाई ने गन्ना लगते समय १० से १५ मिनिट मल्टीप्लायर के घोल में डुबाकर बीजप्रक्रिया की, फिर २ फुट के अंतर से खेत में लगाया, सरी मतलब दो लाइनों के बीच की जगह ५ फुट की रखी है, रासायनिक खाद प्रति एकड़ १०-२६-२६ तथा यूरिया २ थैली दिया. ४) दूसरा डोस देते समय ५० किलो यूरिया में १ किलो मल्टीप्लायर मिलाकर दिया. ५) ऊस को मिटटी चढ़ाते समय प्रति एकड़ २ किलो मल्टीप्लायर रासायनिक खाद में मिलाकर दिया. ६) इस प्रकार कम से कम रासायनिक खाद तथा प्रति एकड़ ३ किलो मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. ७) ऊस की ऊंचाई तथा जाडी जबरदस्त है, ऊस सोमेश्वर सहकारी शक्कर कारखाना सोमेश्वर तहसील बारामती जिला पुणे को गया, २ एकड़ का वजन १७५ टन मिला. ८) कुछ लोग इससे ज्यादा भी उत्पादन लेते हैं, वो रासायनिक खाद तथा दूसरे उत्पाद इतने ज्यादा मात्रा में डालते हैं की, उनका उत्पाद...
बिना पानी का गेहूं फिर भी, १ एकड़ में १५ क्विंटल उत्पादन मिला | गेहूं की फसल में मल्टीप्लायर का रिझल्ट. १) किसान भाई का नाम पंडितराव पाटील ग्राम पाष्टे तहसील शिन्दखेड़ा जिला धुलिया, २) किसान भाई परिसर के बड़े किसान हैं, पिछले ३ सालों से मल्टीप्लायर का इस्तेमाल कर रहे हैं, मिटटी में हो रहे बदलाव स्वयं देख रहे हैं, जब प्रभुसिंग परदेशी सर ने बताया की, आपके लगातार मल्टीप्लायर इस्तेमाल के कारण, आपके खेत की मिटटी से रासायनिक खाद केदुष्परिणाम काफी कम हो गए हैं, शायद बिना पानी गेहूं की फसल आ सकती है. ३) इस बार पानी की समस्या होने के कारण किसान भाई कोई भी फसल ना लगाने का निश्चय कर चुके थे, फिर भी उन्होंने परदेशी सर की बात मानकर प्रयोग करने का निश्चय कर १ एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल लगाईं. ४) पानी देना नहीं था, इसलिए मल्टीप्लायर भी नहीं दिया जा सका, बीजों को लगाने के पहले मल्टीप्लायर से बीजोपचारित किया. ५) फसल पर २ बार १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ६) फसल पहले ही दिन से तेजी से बढ़ रही थी, कल्लों (फुटवों) की संख्या भी ज्यादा मिली, बाली (लोम) निकलने के समय भ...
निम्बू की बाग में मल्टीप्लायर तकनीक से उत्पादन ६ गुना बढ़कर मिला १) किसान भाई का नाम अशोक आर्य ग्राम खामखेड़ा तहसील आष्टा जिला सीहोर, किसान भाई प्रगतिशील किसान हैं, आर्गनिक खेती में विशेष रुचि रखते हैं, बड़ी संख्या में किसान भाई उनके पास आर्गनिक खेती की ट्रेनिंग लेने आते हैं. २) अशोक सर जानकारी से इतने प्रभावित हुए की, उन्होंने स्वयं के खेत में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया. ३) ८ साल की निम्बू की बाग में प्रति पेड़ १० ग्राम मल्टीप्लायर आठ दिन के अंतर से दिया, साथ में १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ४) सम्पूर्ण बाग का कायापलट हो गया, पुरे पेड़ पर जहाँ नजर जाए, निम्बू ही निम्बू नजर आने लगे. ५) अशोक जी का कहना है की, इस बार उन्होंने हमेशा के मुकाबले ६ गुना ज्यादा निम्बू बेचे हैं. ६) उत्पादन ६ गुना बढ़ने के साथ निम्बू की चमक इतनी जबरदस्त थी की, देखते ही खरेदी करने को मन ललचाता है. ७) निम्बू का साइज भी अच्छा मिला, रस ज्यादा होने के कारण, निम्बू लोगों की पहली पसंद बना. ८) अशोक जी ने स्वयं के खेत में मल्टीप्लायर का कमाल देखने के बाद ट्रेनिंग में कि...
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