मिर्ची की फसल में लोकल वेरायटी से उत्पादन 225 किलो लेकिन मल्टीप्लायर तकनीक से उत्पादन 590 किलो मिला याने डबल से ज्यादा..!!

मिर्ची की फसल में लोकल वेरायटी से उत्पादन 225 किलो मिलता था, लेकिन मल्टीप्लायर तकनीक से उत्पादन 590 किलो मिला याने डबल से ज्यादा..!!

१) महादेव सखाराम माने ग्राम बहिरेवाड़ी तहसील आजरा जिला कोल्हापुर इन्होंने मिर्ची की खेती पहले ही दिन से नियोजन बनाकर मल्टीप्लायर के साथ की और हमेशा के मुकाबले डबल से ज्यादा उत्पादन लिया.

२) किसान भाई महादेव माने सर को मिर्ची की खेती का पूरा नियोजन बनाकर, उस नियोजन से खेती उत्पादन डबल से ज्यादा बढ़ा दिया.

३) रासायनिक खाद के साथ मल्टीप्लायर मिलाकर ३ बार दिया है, पहली बार १ थैली १८-१८-१० के साथ १ किलो मल्टीप्लायर, दूसरी बार २ थैली १८-१८-१० के साथ २ किलो मल्टीप्लायर और तीसरी बार १ थैली अमोनियम सल्फेट + १ थैली १८-१८-१० + १ किलो मल्टीप्लायर.

४) १५ लीटर पानी में ५० ग्राम मल्टीप्लायर + १०० मिली गाय का मूत्र मिलाकर पौधों के रूट झोन में दिया.

५) १५ लीटर पानी में मल्टीप्लायर २० ग्राम + पेस्टिसाइड + फंगीसाइड मिलाकर ५ बार फसल पर छिड़काव किया.

६) मिर्ची की वेरायटी का नाम संकेश्वरी है, यह लोकल वेरायटी है, इसका सूखी मिर्ची का एकड़ में उत्पादन ज्यादा से ज्यादा २२५ किलो तक आता था, इस बार निर्भय कुमार सर ने मल्टीप्लायर के साथ रासायनिक खाद का जो नियोजन बनाया उससे उत्पादन ५९० किलो मिला मतलब डबल से भी ज्यादा.



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