करेला की फसल में रासायनिक खाद तथा जहरीली दवाओं का छिड़काव नहीं हुआ.
१) परवेज खान साहब इनकी खेती पारशिवनी नागपुर में है, खान साहब आर्गनिक खेती कर रहे थे, उत्पादन बराबर ना मिलने के कारण खेती नुकसान का सौदा साबित हो रही थी.
२) खान साहब मजबूर होकर रासायनिक खेती की तरफ मुड़ने का निश्चय कर चुके थे, उनकी मुलाकात कंपनी के डीलर सतीश माली सर के साथ हुई, और परवेज खान साहब ने अपने निश्चय को कुछ दिन के लिए स्थगित करने का निर्णय लेकर मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने का मन बनाया. ३) करेले की फसल १८ फेब्रुवारी को लगाईं थी, गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर दिया, इसके अलावा रासायनिक खाद का एक दाना भी नहीं डाला. ४) प्रत्येक २० दिन के अंतर से १५० ग्राम मल्टीप्लायर १५० लीटर पानी में मिलाकर दिया, और प्रत्येक १० दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ५) करेले की बेल दिन दूनी गति से बढ़ने लगी, खेती पहले से आर्गनिक थी, साथ में मल्टीप्लायर की ताकत से फसल बलवान बन गई, इसलिए किसी भी प्रकार का किड रोग फसल पर नहीं आया, परिणामस्वरूप जहरीली दवाओं का एक भी छिड़काव नहीं करना पड़ा. ६) फसल पहले दिन से डार्क ग्रीन बनी रही, भोजन आवश्यकता से अधिक मिल रहा था, इसलिए पत्तों का आकार जम्बो बन गया, करेले का रंग आकर्षक तथा चमकदार होने के कारण बाजार में भाव भी अच्छा मिल रहा है.

Comments
Post a Comment