तरबुज की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक से हार्वेस्टिंग होने के बाद, फसल हरी दिख रही है|

तरबुज की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक से हार्वेस्टिंग होने के बाद, फसल हरी दिख रही है|

1) अनिल दशरथ पाटील ग्राम तांदळवाडी तहसील रावेर जिला जलगांव, किसान भाई प्रगतिशील किसान हैं, पारम्परिक फसलों के साथ व्यापारिक फसलें भी लगाते हैं,मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करके से आप रासायनिक खाद धीरे-धीरे करके बंद कर सकते हैं, आप जैसे-जैसे रासायनिक खाद कम करते जायेंगे, आपका उत्पादन बढ़ता जायेगा, साथ में किड और रोग के लिए किये जानेवाले जहरीली दवाओं के छिड़काव भी कम हो जायेंगे.

2) किसान भाई को २ एकड़ क्षेत्र में तरबूज की फसल लगानी थी,उन्होंने ५ किलो मल्टीप्लायर खरेदी किया, तरबूज के बीज उग जाने के बाद ३०० ग्राम मल्टीप्लायर ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से दिया, उसके १५ दिन बाद ५०० ग्राम, फिर १५ दिन बाद ७०० ग्राम मल्टीप्लायर जमीन से ड्रिप इरीगेशन से दिया.

3) अनिल पाटील साहब ने छिड़काव भी रेग्युलर किया है, प्रत्येक १० दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया है. 4) तरबूज में पहले जितना रासायनिक खाद डाला जाता था, उसमें २५ प्रतिसत कम डाला, उसके बावजूद फसल बलवान बनने से किड रोग हमेशा के मुकाबले कम आये. 5) फसल बलवान बनने के कारण फलों की संख्या के साथ-साथ वजन भी ज्यादा मिला, कुछ फल ५-५ किलो वजन के हैं. 6) रासायनिक खादवाली फसलें तैयार होते-होते सूखने लगती हैं, भोजन की कमी के कारण फल का पोषण करने के लिए पत्तियों से भोजन लेकर फसल फल को बढ़ाती है, यहाँ भोजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था, इसलिए फलों की संख्या ज्यादा रहने के बावजूद एक भी फल का कुपोषण नहीं हुआ, सभी फल बड़े आकर के बने. संदीप सर ने बताया की, किसान भाई मल्टीप्लायर के रिझल्ट से पूरी तरह से खुश हैं, उन्होंने मल्टीप्लायर की मदत से कपास लगाने का निश्चय किया है.




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