सोयाबीन की फसल में मल्टीप्लायर तकनीक से एक पौधे पर फली की संख्या २०० तक हैं l
१) दोस्तों, खेती को फायदे की बनाने के लिए 3 बातें जरुरी हैं, खेती का लागत मूल्य कम हो, किड तथा रोगों की समस्या ना आये और उत्पादन बढ़कर मिले, इन तीन बातों का जहाँ संगम होगा, वहां पैसा पानी की तरह बहकर आएगा.
२) उपरोक्त तीन बातों का संयोग जुड़ने के लिए जरुरी है, फसल की ग्रोथ जबरदस्त हो, पत्तों का आकार बड़ा हो तथा पत्तों का कलर डार्क ग्रीन हो, और यह सब करने की क्षमता है मल्टीप्लायर में, इसलिए हमारे वड़ोदरा गुजरात के विक्रमवीर तथा मल्टीप्लायर के साथ आर्गनिक खेती के प्रणेता राजेंद्र पटेल साहब कहते है, ५ एकड़ की जगह १ एकड़ खेती करो, परंतु मल्टीप्लायर के साथ करो.
३) हेमंत वसंतराव देशमुख ग्राम डोंगरकिन्ही तहसील मालेगांव जिला वाशिम, इन्होंने २ एकड़ क्षेत्र में सोयाबीन की फसल लगाईं थी, दूसरी फसल में मल्टीप्लायर का कमाल देखकर, इस सोयाबीन की फसल पर भी मल्टीप्लायर का छिड़काव करने का निर्णय लिया.
४) १५ लीटर के पंप में १० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर २ बार छिड़काव करने से फसल पूरी ताकत से बढ़ने लगी, ढाई फुट ऊँची है सोयाबीन की फसल, पत्तों का साइज भी बड़ा बन गया, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बन गया, हेमंत सर ने कुछ पौधों पर फली की संख्या गिनने की कोशिश की तब वो भी आश्चर्यचकित रह गए, एक पौधे पर फली की संख्या २०० तक हैं, अब उत्पादन कितना आएगा इसका अंदाज आप खुद लगा सकते हैं
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