आलू की फसल में सिर्फ मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल, फिर भी उत्पादन सबसे ज्यादा.

आलू की फसल में सिर्फ मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल, फिर भी उत्पादन सबसे ज्यादा.

१) सारी दुनिया के वैज्ञानिक कहते हैं कि, फसल को ९६.२ प्रतिसत भोजन प्रकृति के द्वारा मिलता है, परंतु हम हैं कि, रासायनिक खादों का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं. २) ग्राम लोहारी जिला देवास मध्यप्रदेश के प्रगतिशील किसान भाई हैं दिलीप ठाकुर, ३) लोकेश सर ने बताया कि, आप रासायनिक खाद धीरे-धीरे कम करिये, परंतु ठाकुर साहब ने सिर्फ मल्टीप्लायर का ही इस्तेमाल किया, उन्होंने प्रति बीघा १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से दिया, और १५ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. ४) मल्टीप्लायर ने फसल का सम्बन्ध प्रकृति के साथ जोड़ दिया, परिणामस्वरूप फसल को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रकृति से विनामूल्य मिलने लगे और फसल बढ़ने लगी, पुरे गांव में जिन्होंने ठाकुर साहब कि अपेक्षा दुगना तिगुना खर्च किया था, उनकी फसल में ज्यादा से ज्यादा आलू हैं, ठाकुर साहब कि फसल के एक पौधे में कम से कम ११ आलू हैं और ज्यादा से ज्यादा १५ आलू हैं. ५) आलू का साइज भी बड़ा है, एक बीघा में ज्यादा से ज्यादा ९० कट्टे आलू के निकलते हैं, ठाकुर साहब को १२० कट्टे तक उत्पादन मिलने कि सम्भावना है.



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