अंगूर की १ बेल पर ३५ से ४० गुच्छे ( घड़ ) लगे हैं, साइज भी अच्छा बन रहा है, मल्टीप्लायर तकनीक का लगातार इस्तेमाल होने के कारण दूसरे खर्चों में कमी आई है|
पहला बहार फिर भी जोरदार.
१) फसल कोई भी हो जितने भोजन की आवश्यकता है, उतना नहीं मिलने पर फसल कमजोर हो जायेगी, किड तथा रोगों का अटेक होगा, जहरीली दवाओं पर पैसा खर्च करने के बावजूद उत्पादन कम आएगा, खर्च ज्यादा उत्पादन कम, अगर बाजार भाव कम मिला तो खेती घाटे का सौदा साबित होगी. २) जिस फसल से किसान भाई को ज्यादा पैसा मिलता है, ऊस फसल के लिए कंपनीवाले अनेक महंगेवाले उत्पादन इस्तेमाल करते हैं, किसान भाई खेती करके उनका घर भर रहा है. ३) रविकिरण जगताप इनकी खेती ग्राम तारूखेड़ले तहसील निफाड़ जिला नाशिक में है, इनका अंगूर की बाग में पहला बहार था, प्रत्येक १५ दिन के अंतर से इन्होंने ५०० ग्राम आधुनिक तकनीक से ड्रिप इरीगेशन ( टपक पद्धत ) से लगातार दिया. ४) अंगूर की १ बेल पर ३५ से ४० गुच्छे ( घड़ ) लगे हैं, साइज भी अच्छा बन रहा है, मल्टीप्लायर तकनीक का लगातार इस्तेमाल होने के कारण दूसरे खर्चों में कमी आई है.
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