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मल्टीप्लायर तकनीक से पौधों पर फलियां ही फलियां.!!

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मल्टीप्लायर तकनीक से पौधों पर फलियां ही फलियां.!!   १) किसान भाई का नाम पंजाबराव इंगले चांदुर बाजार अमरावती, इन्होने २ एकड़ क्षेत्र पर तूर की फसल लगाईं है, कपास की फसल में अच्छा रिझल्ट मिलने के बाद, तूर की फसल में भी उपयोग किया| २) २ एकड़ क्षेत्र में रासायनिक खाद सिर्फ १०० किलो इस्तेमाल किया, उसमें १ किलो मल्टीप्लायर मिलाकर खेत में दिया. ३) किसान भाई ने फसल पर ३ बार मल्टीप्लायर का छिड़काव किया, १५ लीटर पानी में २० ग्राम मल्टीप्लायर + ५ मिली कृष्णा ऑल क्लियर + १ मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर छिड़काव किया. ४) भरी मात्रा में फलियां लग चुकी हैं, लगने का क्रम सुरु है, फूल भी फलियां लगने के बाद भी लगातार आ रहे हैं, निश्चित ही उत्पादन बढ़कर मिलेगा.

कम से कम ३० प्रतिसत उत्पादन बढ़कर मिल रहा है!

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कम से कम ३० प्रतिसत उत्पादन बढ़कर मिल रहा है!   १) किसान भाई का नाम सौरभ पवार साक्री जिला धुलिया, इनकी खेती कंपनी के प्रतिनिधि मनोज भदाणे सर के नजदीक है, इन्होने भदाणे सर की खेती देखकर स्वयं के खेत में मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया. २) गुजरात में तुवर की हरी फलियां बिकती हैं, इसकी वेरायटी भी अलग है, सौरभ सर ने २० आर क्षेत्र में तुवर की फसल लगाईं है. ३) प्रत्येक आठ दिन के अंतर से १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया जा रहा है. ४) पुरे खेत में सिर्फ फूल और तुवर की फलियां ही दिख रही हैं, तुवर की फलियों की बिक्री प्रारम्भ हो गई है.मनोज सर का कहना है की, किसान भाई ने मल्टीप्लायर की पूरी ट्रीटमेंट नहीं की है, सिर्फ छिड़काव किया है, उसके बावजूद कम से कम ३० प्रतिसत उत्पादन बढ़कर मिल रहा है.

सब तरफ फूल और अरहर की तैयार होती फलियां नजर आती हैं!

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सब तरफ फूल और अरहर की तैयार होती फलियां नजर आती हैं!   १) किसान भाई का नाम श्री अमोल इंगले ग्राम किनखेड तहसील अकोट जिला अकोला महाराष्ट्र. २) मल्टीप्लायर विक्रेता तथा मार्गदर्शक विक्रमवीर पुरस्कार विजेते श्री सतीश माली सर. ३) किसान भाई ने अरहर की खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल किया. ४) किसान भाई के पास पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण, सिर्फ मल्टीप्लायर और कृष्णा स्प्रे प्लस का छिड़काव किया गया है. ५) खेत में जहाँ भी नजर जाती है, सब तरफ फूल और अरहर की तैयार होती फलियां नजर आती हैं. ६) बिना पानी की फसल में इतना उत्पादन किसान भाई ने पहले कभी नहीं देखा.

सिर्फ थोड़ासा मल्टीप्लायर इस्तेमाल किया. उत्पादन में ४० किलो की बढ़त मिली.

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  सिर्फ थोड़ासा मल्टीप्लायर इस्तेमाल किया. उत्पादन में ४० किलो की बढ़त मिली! १) किसान भाई का नाम श्री अब्दुल रज्जाक शेख ग्राम तिथवा तहसील वांकानेर जिला राजकोट गुजरात, इनको कंपनी की प्रतिनिधि फिनिक्स क्रॉप प्रोटेक्शन कंपनी ने मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से अधिक उत्पादन लेने की तकनीक बताई. २) किसान भाई ने एक क्षेत्र में 400 ग्राम मल्टीप्लायर पानी के साथ दिया और एक बार 15 लीटर पानी में 15 ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव किया. 3) किसान भाई ने गिलकी की फसल दो खेतों में लगाईं थी, एक में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया एक में नहीं किया. ४) जिस खेत में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया था, उस खेत से 190 किलो गिलकी मिल रही है और जिस खेत में इस्तेमाल नहीं किया था, उस खेत से 150 किलो गिलकी का उत्पादन मिल रहा है. ५) मल्टीप्लायर के रिजल्ट से प्रभावित किसान भाई ने सम्पूर्ण खेती में होनेवाली सभी फसलों में मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया.

उत्पादन में 25 प्रतिसत से ज्यादा बढ़त मिलेगी

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  उत्पादन में 25 प्रतिसत से ज्यादा बढ़त मिलेगी! १) किसान भाई का नाम जगदीश धनजी हिरानी गांव सुखपर तहसील जिला कच्छ गुजरात, इनको कंपनी के प्रतिनिधि श्री अश्विन वर्सानी सर ने गवार की खेती में कम खर्च में अधिक उत्पादन लेने के लिए मल्टीप्लायर तकनीक की जानकारी दी. २) किसान भाई ने एक एकड़ क्षेत्र में गवार की फसल लगाईं थी, उसमें 2 किलो मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया. ३) 200 ग्राम मल्टीप्लायर प्रति सप्ताह 4 बार पानी के साथ दिया. ४) बचा हुआ मल्टीप्लायर छिड़काव में इस्तेमाल किया, 15 लीटर पानी में 15 ग्राम मल्टीप्लायर + 02 मिली कृष्णा ऑल क्लियर + 01 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर छिड़काव किया. ५) फसल के पत्ते गहरे हरे रंग के बन गए, ग्रोथ तेज रही, गवार की संख्या इतनी ज्यादा है की, आस-पड़ोस के किसान भाई फसल को देखने आ रहे हैं. ६) फसल को देखनेवाले किसान भाइयों का कहना है की, उत्पादन बढ़कर आएगा.

पौधों कि संख्या ३८ से ४० हजार है!

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  उत्पादन रेकॉर्ड ब्रेक करने की शक्यता. 1) सतीश ज्योतिराम म्हेत्रे ग्राम वरकुटे खुर्द तहसील इंदापुर जिला पुणे, प्रगतिशील किसान भाई हैं, इनको रासायनिक खादों के दुष्परिणामों की अच्छी जानकारी है, इसलिए इन्होंने ५०-५० किलो की थैलीवाले रासायनिक खाद की जगह ड्रिप से दिए जानेवाले सिर्फ १० किलो वॉटर सॉल्युबल खाद इस्तेमाल किये हैं. २) एक एकड़ क्षेत्र में मल्चिंग पेपर लगाकर गवार की खेती की है, किसान भाई की जमीन ज्यादा अच्छी नहीं है, उसके बावजूद गवार की फसल एक जैसी बढ़ रही है, फसल लगातार गहरे हरे रंग की बनी हुई है,पौधों कि संख्या ३८ से ४० हजार है. ३) किसान भाई ने दो बार ५०० ग्राम मल्टीप्लायर के साथ वॉटर सॉल्युबल रासायनिक खाद ड्रिप इरीगेशन ( टपक पद्धत ) से दिया है. ४) कंपनी के डीलर महेंद्र शेंडे सर ने किसान भाई को बताया है कि, जब भी किसी भी कारण से छिड़काव करना पड़े उसमें मल्टीप्लायर जरूर मिलाएं.

सप्टेम्बर तक पानी नहीं था, आज उत्पादन में रेकार्ड ब्रेक करने की स्तिथि में.

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  सप्टेम्बर तक पानी नहीं था, आज उत्पादन में रेकार्ड ब्रेक करने की स्तिथि में! १) किसान भाई का नाम शब्बीर मंसूरी मालेगांव जिला नाशिक, इन्होने सुरजने की फली के पौधे लगाए थे, सेप्टेम्बर महीने तक बरसात नहीं हुई, अक्टूबर में बरसात भी हुई और कुवों में पानी भी आ गया. २) किसान भाई को कंपनी के प्रतिनिधि सतीष माली सर ने मल्टीप्लायर की मदत से कम समय में पौधों की ग्रोथ के साथ ज्यादा उत्पादन लेने की तकनीक बताई. ३) किसान भाई ने पानी की व्यवस्था होते ही २०० ग्राम मल्टीप्लायर २ बार ड्रिप इरीगेशन से दिया, प्रत्येक १० दिन के अंतर से मल्टीप्लायर + कृष्णा ऑल क्लियर + कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाकर छिड़काव सुरु है. ४) सुरजने की फली की खेती में फूल गिरने की बड़ी समस्या जिससे सभी किसान भाई परेशान रहते हैं, इस खेत में नहीं आई, फूलों की संख्या भी ज्यादा है और ज्यादा से ज्यादा फूल फली में कन्वर्ट हो रहे हैं. ५) पौधे गहरे हरे रंग के हो गए हैं, सूर्यप्रकाश की मदत से भोजन भी ज्यादा बन रहा है, इसलिए फलियों के पोषण की समस्या की कोई चिंता नही है.